Apple के सह-संस्थापक स्टीव वोज़निएक ने कहा है कि वे नहीं मानते कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता निकट भविष्य में इंसानों की पूरी तरह जगह ले सकती है। मार्च 23 को उन्होंने विभिन्न मीडिया शोज में AI पर अपने विचार साझा किए और बताया कि वे खुद इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते।

वोज़निएक खुद AI का उपयोग लिमिटेड रखेंगें

75 वर्ष के वोज़निएक ने बताया कि वे कई बार AI से सवाल पूछ कर उसकी क्षमताओं को परखते हैं। उनके अनुसार कई बार एक महत्वपूर्ण शब्द होता है जो वे दिशा बताने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन AI उन सवालों के जवाब में विषय से जुड़े बहुत सारे स्पष्टीकरण दे देता है जो जरूरी तौर पर वही नहीं होते जो वे ढूंढ रहे होते हैं।

उन्हें AI के दिए गए जवाब अक्सर "बहुत सूखे और परफेक्ट" लगते हैं और यह बात उन्हें निराश करती है। वे कहते हैं कि अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिखा है कि हम मस्तिष्क को इतनी अच्छी तरह समझ चुके हैं कि AI इंसान की तरह भावनाएं रख सके, परवाह कर सके या नैतिकता से काम करना चाहें।

उनकी मुख्य आपत्तियां

  • AI जवाबों में मानवीय गर्मजोशी और भावनात्मक समझ का अभाव।
  • कभी-कभी AI उपयुक्त लेकिन अप्रासंगिक जानकारी देता है, यानी जवाब विषय के आसपास होते हैं पर मूल इच्छित बिंदु से दूर।
  • वोज़निएक का मानना है कि AI के पास अभी वो गुण नहीं हैं जो इंसान को इंसान बनाते हैं, जैसे दूसरों की मदद करने की इच्छा या नैतिक समझ।

AI का बढ़ता हुआ रोल, पर विवाद भी साथ में

यह कहना सच्चाई है कि AI रोजमर्रा की चीजों में तेजी से शामिल हो रहा है। कई कंपनियां और शख्सियतें AI टूल्स बना रही हैं ताकि काम और फैसले आसान हों। इसी तरह कुछ सर्विस कंपनियां ऐसे प्रयोग कर रही हैं जिनमें कर्मचारियों की मदद से AI एजेंटों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

साथ ही सोशल मीडिया और गेमिंग समुदायों में AI के इस्तेमाल पर सवाल उठते रहे हैं। कई जगहों पर लोगों ने AI द्वारा तैयार की गई सामग्री को ठुकराया है और डेवलपर्स को भी आलोचना झेलनी पड़ी है।

वोज़निएक के विचार से साफ है कि वे AI के काम आने की संभावना को पूरी तरह नकारते नहीं, पर वह इसे इंसान की जगह लेने वाला नहीं मानते। उनका खुला रवैया बताता है कि वे टेक्नोलॉजी के विकास को देखते हैं, लेकिन मानवीय गुणों की कमी उन्हें चिंतित और कभी-कभी निराश कर देती है।