बेइрут की जलती हुई स्काइलाइन ने एक बार फिर दिखा दिया कि युद्ध की आग कितनी जल्दी आम लोगों की दुनिया बदल देती है।

क्या हुआ

गुरुवार को इज़राइली सेनाओं ने लेबनानी राजधानी बेइрут के केंद्र में नया हमला किया। बशौरा इलाके और शहर के दक्षिणी उपनगरों पर हवाई और जमीनी हमले हुए, जिससे कई जगहों पर काले धुएं के विशाल बादल उठे और भयावह नज़ारा बन गया।

सेना ने ज़ुक़ाक अल-ब्लात नाम की एक इमारत को खाली करने की चेतावनी भी जारी की। यह कदम हाल की तेज बमबारी का हिस्सा माना जा रहा है, जो अब एक हफ्ते से ज़्यादा समय से बढ़ी हुई है।

निगोड़े-निगोड़े आंकड़े

  • हत्याओं की संख्या: लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कम से कम 687 लोग मारे जा चुके हैं।
  • घायल: 1,500 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
  • विस्थापन: 8 लाख से ज़्यादा लोग अपने घरों से बेघर हुए हैं।

क्यों और किससे

यह हिंसा तब बढ़ी जब 2 मार्च के बाद सीमा पर तनाव तेज हुआ। इज़राइल का कहना है कि उसका अभियान लेबनान में सक्रिय हथियारबंद समूहों, खासकर हेज़बोल्लाह, के खिलाफ है। हेज़बोल्लाह ने भी प्रतिआक्रमण के रूप में अलग-अलग रॉकेट दागे, और एक बार बड़ी तादाद में हमले किए जिनमें इरान के साथ तालमेल के संकेत भी मिले।

मानवीय असर — यह सबसे दिल दहला देने वाला हिस्सा है

संयुक्त राष्ट्र और राहत संगठन बार-बार बता रहे हैं कि आम नागरिक सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। जिन लोगों ने अपने घर खो दिए, वे अब स्कूलों में अस्थायी भागने, रिश्तेदारों के पास या समंदर किनारे लगे तंबुओं में रह रहे हैं।

एक सुनियोजित लेकिन भयानक घटना में, रामलेट अल-बैदा के समुद्री तट पर जहां विस्थापित परिवार तंबुओं में सो रहे थे, एक डबल-टैप हमले में कम से कम 12 लोगों की जान चली गई।

सरकारी आश्रयों की हालत भी बुरी है; लगभग 90 प्रतिशत जगहें भर चुकी हैं। ऐसे में लोग न घर वापस जा सकते हैं और न ही आमदनी का भरोसा बचा है।

छोटी-सी तस्वीर, बड़ा-सा सच

संक्षेप में, परिणाम यही है: शहरों पर काला धुआं, परिवार बिखरे हुए, बुनियादी ज़रूरतें कम और अस्थिरता बहुत। जो लोग काम पर निर्भर थे, वे अब बिना रुपये और बिना आशियाने के हैं। युद्ध की कोई सीधी तारीख अभी दिखाई नहीं दे रही, और यही अनिश्चितता सबसे दर्दनाक है।

नोट: ये आंकड़े और घटनाएँ स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालयों और राहत संगठनों के ताज़ा बयानों पर आधारित रिपोर्टिंग का सार हैं।