ब्लैकरॉक के सह-संस्थापक लैरी फिंक ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान युद्ध के चलते तेल की कीमतें $150 तक चढ़ती हैं तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को "तेज़ और सख्त मंदी" का सामना करना पड़ सकता है। ये बयान उस समय आया है जब कच्चे तेल की कीमतों में हाल के हफ्तों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है।

क्या घटना हुई?

ईरान ने प्रभावी रूप से हॉर्मुज़ जलसन्धि को तेल टैंकरों के लिए बंद कर दिया है, जिससे तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा और कीमतें ऊपर गईं। कुछ हफ्तों में ब्रेंट क्रूड कई बार $100 के निशान को पार कर गया। हाल की कुछ कूटनीतिक चर्चाओं से कीमतें दो दिनों में थोड़ी नीचे आईं, फिर भी ब्रेंट क्रूड अभी करीब $94 पर बना हुआ था।

फिंक की मुख्य बातें

  • ऊँची ऊर्जा कीमतें गरीबों पर सबसे ज्यादा असर डालती हैं। फिंक ने कहा कि ऊर्जा मूल्य एक बहुत ही रिग्रेसिव टैक्स की तरह काम करते हैं।
  • यदि ईरान लंबे समय तक एक खतरा बना रहता है तो तेल कई वर्षों तक $100 से ऊपर और संभवतः $150 के करीब रह सकता है।
  • ऐसी स्थिति का अर्थ होगा कि आर्थिक प्रभाव "गहरा और तेज" होगा और इसका असर सबसे ज्यादा निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा।
  • दूसरी ओर, अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय संबंधों में वापस आ जाए तो तेल की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर से भी कम, यानी लगभग $70 तक गिर सकती हैं।
  • फिंक ने 2008 के वित्तीय संकट से किसी समानता को नकारा और कहा कि वह 2008 जैसा कोई हालात नहीं देख रहे।

ऊर्जा उद्योग और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

शेल के प्रमुख वेल सावन ने एक तेल सम्मेलन में चेतावनी दी कि अगर मौजूदा हालात ऐसे ही रहे तो अगले महीने यूरोप ईंधन की कमी और राशनिंग का सामना कर सकता है। उनका कहना था कि पहले प्रभाव दक्षिण एशिया पर पड़ा, फिर दक्षिण-पूर्व और उत्तर-पूर्व एशिया में फैला और अब यूरोप पर असर बढ़ रहा है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के प्रमुख फतिह बियोल ने कहा कि एजेंसी जरूरत पड़ने पर अपने आपातकालीन तेल भंडार जारी करने के लिए तैयार है, पर वे आशा करते हैं कि ऐसा करने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर खतरा बताया और देशों से कहा कि वे एक ही स्रोत पर निर्भर न रहें बल्कि सौर और पवन जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ें।

अन्य आर्थिक टिप्पणियां

ब्लैकरॉक के फिंक ने यह भी कहा कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर को लेकर "बबल" नहीं मानते। उनका मानना है कि पूरे सेक्टर में नहीं, बल्कि कुछ कंपनियों में असफलताएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रभुत्व की दौड़ में अगर अमेरिका अधिक निवेश नहीं करता तो चीन बढ़त बना लेगा, इसलिए अमेरिका को एआई क्षमताओं का तेजी से विकास करना चाहिए।

नतीजा क्या हो सकता है

संक्षेप में, अगर तेल $150 तक पहुंचता है तो यह वैश्विक खर्च और महंगाई को बढ़ाकर विशेष रूप से कम आय वाले लोगों की जेब पर भारी पड़ेगा और अर्थव्यवस्था में तीव्र संकुचन का कारण बन सकता है। वहीँ, शांतिकारक कूटनीति और ईरान का अंतरराष्ट्रीय मंचों में लौटना कीमतें वापस नीचे ला सकता है।

ये हालात हमें एक बात याद दिलाते हैं: ऊर्जा उपलब्धता और कीमतें सीधे अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा की जिंदगी से जुड़ी हैं। निर्णय-makers के लिए चुनौती यह है कि वे तुरंत उपाय करें और साथ ही दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को भी त्वरित गति से अपनाएं।