कुछ पत्रकार अक्सर अपनी ही बनाई हुई कहानियों में इतने खो जाते हैं कि वे उन्हें सच मान लेते हैं। हालिया घटनाक्रम में यही हुआ जब डोनाल्ड ट्रम्प के इज़रायल के साथ ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के फैसले के बाद कई टिप्पणीकारों ने जोर-शोर से प्रचार चलाया कि MAGA आंदोलन का आधार टूट गया है।
क्या हुआ था?
कुछ मीडिया सिर्फ़ इतना दिखाने पर आगे बढ़ गए कि ट्रम्प ने नेतन्याहू के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने का आदेश दिया और इससे उनके MAGA अनुयायियों में दरार आ गई। यह कहानी काफी तेज़ी से फैल गई और कई ने इसे बड़े राजनीतिक विभाजन के रूप में पेश किया।
मीडिया में उठी आवाजें
- मेगन केली ने सवाल उठाया कि क्या यह "अमेरिका फर्स्ट" के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है।
- जो रोगन ने संभावित अप्रत्याशित परिणामों पर चिंता जताई।
- टकर कार्लसन ने चेतावनी दी कि बिना जरूरत का हमला क्षेत्र में और अस्थिरता पैदा कर सकता है।
इन प्रतिक्रियाओं ने कुछ हेडलाइन्स में बड़े विवाद का रूप ले लिया और कहा गया कि MAGA के भीतर "गृहयुद्ध" जैसा माहौल बन गया है।
असलियत कुछ और ही है
विषय पर ठंडे दिमाग से देखें तो यह कहना कि MAGA टूट गया है, गलत है। असहमत होना और टूट जाना अलग बातें हैं। MAGA कोई पारंपरिक गठबंधन नहीं है जो नीति-निर्देशों या सिद्धांतों से बंधा हो। यह ज़्यादातर एक आदमी के इर्द-गिर्द गठित राजनीतिक शक्ति है: डोनाल्ड ट्रम्प।
ट्रम्प की राजनीतिक छवि और उसकी उपलब्धियों के पीछे जो वफादारी है, वह भावनात्मक और गहरी है। पिछले कई सालों में ट्रम्प ने उन कई संकटों और आरोपों का सामना किया जो सामान्य राजनेताओं को नष्ट कर देते। इसके बावजूद उनके समर्थक टिके रहे और कुछ मामलों में उनका साथ और मजबूत हुआ।
नाराजगी आंख लगाकर गायब नहीं होती
मीडिया में जो असंतोष दिखाई देता है, वह अधिकतर अस्थायी है। कुछ प्रभावशाली आवाजें आलोचना करती हैं, पर वे जानती हैं कि ट्रम्प के समर्थक आधार से पूरी तरह अलग होना उनके करियर के लिए बेहतर नहीं होगा। कार्लसन ने आलोचना के बाद भी अपनी वफादारी जताई। केली और रोगन ने जोखिमों पर सवाल उठाए, पर उन्होंने भी समर्थन छोड़ने की हिमाकत नहीं की।
क्यों नहीं टूटेगा?
- बुनियादी वफादारी भावनात्मक है, नीतिगत; इसलिए नीतियों में बदलाव पर भी समर्थन टिके रहता है।
- रिपब्लिकन पार्टी के अंदर अलग-अलग रुझान हैं, पर व्यापक विद्रोह की कोई बड़ी लहर नजर नहीं आ रही।
- प्रभावशाली व्यक्तियों को अपनी पहुंच और दर्शक-आधार बचाने का व्यावहारिक कारण मिलता है कि वे वर्ग से पूरी तरह अलग न हो जाएं।
संक्षेप में, फिलहाल MAGA में हल्की खिंचत दिख सकती है, पर उसे दृढ़ता से टूटना कहना अभी बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाना है। जो लोग उम्मीद कर रहे हैं कि ये विवाद आंदोलन को जड़ से हिला देगा, वे अक्सर वही चारा बार-बार पकड़ा रहे हैं।
नज़रिया साफ़ है: असंतोष मौजूद है, पर वह विद्रोह नहीं। ट्रम्प के प्रति जो व्यक्तिगत लगाव है, वह आलोचना को घुला देता है और कई जोरदार आलोचक अंततः उसी राजनैतिक कक्षा में बने रहते हैं।
अंततः, जो लोग MAGA के विभाजन की लगातार भविष्यवाणी कर रहे हैं, वे हर बार वही परिनाम देखते हैं: थोड़ी हलचल, फिर वही पुरानी स्थिति। यह एक तात्कालिक झंझावात है, चेहरा बदलने वाला तूफ़ान नहीं।