सरकारी शटडाउन के चलते एयरपोर्ट पर लंबी कतारें बनती दिखीं और प्रशासन ने असामान्य कदम उठाते हुए Immigration and Customs Enforcement के एजेंटों को TSA के सहयोग के लिए भेजा। यह तैनाती सोमवार को शुरू हुई और कुछ प्रमुख हवाई अड्डों पर एजेंट्स नजर आए।
क्या हुआ
रिपोर्टों के मुताबिक ICE एजेंट पहले दिन Louis Armstrong New Orleans International और Hartsfield-Jackson Atlanta International जैसे हवाई अड्डों पर पहुंचे। यात्री सुरक्षा जांच में कई घंटों तक प्रतीक्षा की शिकायत कर रहे थे, कुछ ने तीन घंटे तक रुकने की बात बताई।
कौन भेजा और क्यों
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि ICE एजेंट एयरपोर्टों पर जाकर TSA अधिकारियों की मदद करेंगे. सरकार के आंशिक बंद होने की वजह से TSA की कार्यबल कमी बन रही थी और यह कदम कतारों को संभालने के उद्देश्य से लिया गया।
वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
शटडाउन Homeland Security के फंडिंग पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के मध्य गतिरोध के कारण है। डेमों का कहना है कि DHS की इमिग्रेशन पॉलिसीज़ में बदलाव आना चाहिए, खासकर उन घटनाओं के बाद जिनमें ICE की तैनाती के बाद मौतें हुईं। रिपब्लिकन ने DHS के केवल गैर-इमिग्रेशन हिस्सों के लिए अलग फंडिंग की प्रस्तावना को ठुकराया।
कुछ जरूरी बातें जो जाननी चाहिए
- ICE का फंड अलग है. वर्तमान शटडाउन से ICE पर ओवरऑल फंडिंग का असर नहीं पड़ा, इसलिए एजेंट तैनात किए जा सकते हैं।
- प्रशिक्षण का अंतर. TSA ऑफिसर एयरपोर्ट सुरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षित होते हैं। ICE एजेंटों का काम मूल रूप से अलग है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि वे कितनी तेजी से नए रोल में ढलेंगे।
- लंबित सवाल. यात्रियों की सुरक्षा, कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर सवाल उठे हैं कि क्या यह अस्थायी व्यवस्था प्रभावी और सुरक्षित रहेगी।
इसी दिन अन्य विमानन व्यवधान
ICE की तैनाती के अलावा सोमवार को और भी समस्याएं सामने आईं। देर रात LaGuardia एयरपोर्ट पर एक विमान हादसे की वजह से सत्र रोका गया और उस एयरपोर्ट पर कम से कम दोपहर तक असर रहा। पास के Newark एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर में धुँआ दिखने के कारण उड़ानें रोकी भी गईं। इन घटनाओं ने पूरे नेटवर्क पर दबाव और बढ़ा दिया।
निचोड़
सरल शब्दों में, प्रशासन ने भीड़ और देरी से निपटने के लिए एक असामान्य समाधान अपनाया है। यह कदम तात्कालिक राहत दे सकता है पर प्रशिक्षण, जिम्मेदारियों और सुरक्षा मानकों पर उठ रहे प्रश्नों से यह साफ नहीं कि यह प्रणाली कितनी कारगर साबित होगी। यात्रियों को फिलहाल लंबी प्रतीक्षा और संभावित विमानन व्यवधानों के लिए तैयार रहना चाहिए।