ट्रंप का रुख, और उसकी सीधी-सादी उलझन
डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि उन्हें इस बात से कोई परेशानी नहीं होगी कि एक रूसी तेल टैंकर क्यूबा तक राहत सामग्री पहुंचाए। यह वही क्यूबा है, जिस पर अमेरिकी तेल नाकेबंदी ने भारी दबाव डाल रखा है। इतना ही नहीं, यह बयान उनकी सरकार की उस सख्त नीति के बीच आया है, जो कैरिबियाई देश के प्रति लगातार अधिक आक्रामक होती दिख रही है।
वॉशिंगटन लौटते समय पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर कोई जहाज वहां मदद लेकर जा रहा है, तो उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि लोगों को किसी तरह जीवित रहना है।
उन्होंने New York Times की उस रिपोर्ट पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि टैंकर को क्यूबा पहुंचने दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि अगर कोई देश अभी क्यूबा में तेल भेजना चाहता है, तो उन्हें इससे कोई समस्या नहीं, चाहे वह रूस ही क्यों न हो।
मातांज़ास पहुंचा प्रतिबंधित टैंकर
सोमवार को रूस के परिवहन मंत्रालय ने पुष्टि की कि तेल टैंकर Anatoly Kolodkin क्यूबा के मातांज़ास बंदरगाह पर पहुंच गया है। जहाज करीब 7,30,000 बैरल तेल लेकर आया, जिसे मंत्रालय ने “मानवीय आपूर्ति” बताया।
दिलचस्प यह है कि यह जहाज खुद अमेरिका, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के प्रतिबंधों के दायरे में आता है। यूक्रेन युद्ध के बाद उस पर ये पाबंदियां लगाई गई थीं।
क्यूबा पर दबाव, और उसके नतीजे
ट्रंप सरकार ने क्यूबा के प्रति हाल के अमेरिकी प्रशासन की तुलना में कहीं ज्यादा सख्त रुख अपनाया है। इसका मकसद क्यूबा तक अहम तेल आपूर्ति रोककर शासन परिवर्तन पर दबाव बनाना बताया गया है। कागजों पर यह नीति बड़ी रणनीतिक लग सकती है, लेकिन जमीन पर इसका असर क्यूबा के आम लोगों पर पड़ा है।
द्वीप भर में बिजली कटौती ने पहले से संकट झेल रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। गैसोलीन और बुनियादी संसाधनों की कमी ने अस्पतालों को प्रभावित किया है और सार्वजनिक परिवहन को भी लगभग पंगु बना दिया है। ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भले ही यह कहते रहें कि उनका उद्देश्य जनता की मदद है, लेकिन हालात कुछ और ही कहानी कहते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अनुमानित आपूर्ति क्यूबा में लगभग 1,80,000 बैरल डीजल में बदली जा सकती है, जो देश की रोज़मर्रा की मांग को करीब 9 या 10 दिन तक पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी।
रूस, अमेरिका और क्यूबा की पुरानी रस्साकशी
क्यूबा लंबे समय से अमेरिका और रूस के बीच भू-राजनीतिक खींचतान का केंद्र रहा है। यह कहानी नई नहीं है, बस समय-समय पर नया पैक पहन लेती है।
रविवार को ट्रंप ने यह विचार खारिज कर दिया कि टैंकर को क्यूबा तक जाने देने से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को कोई फायदा होगा।
उनके मुताबिक, इससे पुतिन को कुछ खास नहीं मिलता। ट्रंप ने कहा कि रूस सिर्फ एक जहाज का तेल खो देगा, बस इतना ही। अगर वह या दूसरे देश ऐसा करना चाहते हैं, तो उन्हें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।
उन्होंने यह भी कहा कि इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि क्यूबा वैसे भी खत्म हो चुका है। ट्रंप के शब्दों में, वहां की सरकार खराब है और नेतृत्व भ्रष्ट है, इसलिए एक तेल जहाज आए या न आए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
बावजूद इसके, ट्रंप ने जोड़ा कि वह ऐसे जहाज को आने देने के पक्ष में होंगे, चाहे वह रूस से हो या किसी और देश से, क्योंकि लोगों को गर्मी, ठंडक और बाकी जरूरी चीजें चाहिए।