संगीत की दुनिया में एक अजीब सी चाल चली। नॉर्थ कैरोलिना के 52 वर्षीय माइकल स्मिथ ने हजारों नकली गाने तैयार कराए, फिर 1,040 बॉट्स से उन गानों की स्ट्रीम्स बढ़ाईं और करोड़ों रुपये के बराबर रॉयल्टी बटोर ली। अब उसने दोष स्वीकार किया है और कानून उसका हिसाब करेगा।

क्या हुआ ठीक-ठीक

डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के अनुसार यह धोखाधड़ी 2017 से 2024 तक चली। स्मिथ और उसके सहयोगियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके सैकड़ों हजार गाने बनाए। फिर ये गाने "अंडर-द-रडार" कलाकारों के अकाउंट्स पर पोस्ट किए गए और बॉट्स के जरिए बार-बार चलाए गए ताकि असली सुनने वालों जैसी दिखावट बने।

सिस्टम कैसे काम करता था

  • बॉट्स और क्लाउड: मामले में 52 क्लाउड सर्विस अकाउंट थे, हर अकाउंट पर लगभग 20 बॉट्स। कुल मिलाकर 1,040 बॉट्स बनते हैं।
  • स्ट्रीम क्षमता: स्मिथ के अपने हिसाब से ये बॉट्स प्रतिदिन कुल 636 गाने स्ट्रीम कर सकते थे, जो कुल 661,440 स्ट्रीम्स प्रतिदिन बनाते हैं।
  • कमाई का अंदाजा: स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स प्रति स्ट्रीम कुछ सेंट का भुगतान करते हैं। स्मिथ ने आधा सेंट प्रति स्ट्रीम मानकर गणना की और पाया कि यह करीब 3,307 डॉलर प्रतिदिन या लगभग 1.2 मिलियन डॉलर प्रति वर्ष हो सकता है।

डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने कहा कि इस योजना से स्मिथ ने 8,091,843.64 डॉलर से अधिक रॉयल्टी हासिल कर ली।

कानूनी परिणाम

19 मार्च 2026 को स्मिथ ने वायर फ्रॉड की मिलीभगत का अपराध स्वीकार किया। अब उसकी सजा सुनवाई 29 जुलाई 2026 को तय है। अधिकतम सजा पांच साल कैद हो सकती है और उसने 8,091,843.64 डॉलर जब्त करने पर सहमति दी है।

अधिकारियों की टिप्पणी

संयुक्त राज्य के अटॉर्नी जय क्लेटन ने कहा कि "माइकल स्मिथ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके हजारों नकली गाने बनाए और फिर उन नकली गानों को अरबों बार स्ट्रिम करवा दिया।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि "भले ही गाने और श्रोता नकली थे, स्मिथ द्वारा चुराई गई लाखों डॉलर वास्तविक थे। रॉयल्टी के ये करोड़ें असली कलाकारों और अधिकार धारकों से हटकर चला गया।"

क्यों यह मामला मतलब रखता है

यह घटना दो प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डालती है:

  • AI और रॉयल्टी संरचना: जब गाना बनाना और फैलाना स्वचालित हो जाए तो सिस्टम से दुरुपयोग की गुंजाइश बढ़ जाती है।
  • प्लेटफॉर्म निगरानी: स्ट्रीमिंग सेवाओं को ऐसे व्यवहारों का पता लगाने और रोकने के लिए बेहतर तरीके अपनाने की जरूरत है ताकि सचमुच काम करने वाले कलाकारों को नुकसान न हो।

कुल मिलाकर यह मामला बताता है कि तकनीक का इस्तेमाल वैध भी हो सकता है और दुरुपयोग भी कर सकता है। कानून ने अब कदम उठाए हैं और अगला अध्याय 29 जुलाई 2026 को होगा, जब सजा तय की जाएगी।