क्या हुआ
दुनिया की सबसे बड़ी AI कॉन्फ्रेंस NeurIPS ने मार्च में अपनी सबमिशन गाइडलाइन में एक नया नियम जोड़ा। नियम कहता था कि सम्मेलन उन संगठनों को समीक्षा, संपादन और प्रकाशन जैसी सेवाएं नहीं देगा जो अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में हैं। इस सूची में कुछ चीनी कंपनियां जैसे Tencent और Huawei समेत अन्य देश भी शामिल थे। खबर फैलते ही चीनी शोधकर्ताओं और अकादमिक संस्थाओं ने इसका कड़ा विरोध किया और कुछ ने सम्मेलन का बहिष्कार करने की धमकी दे दी। कुछ ही दिनों में NeurIPS ने वह नियम वापस लेकर कहा कि लिंक गलत था और सीमाएं असल में केवल बहुत तंग सूची पर लागू होती हैं।
नियम क्या कहता था और उसे क्यों बदला गया
- आरंभिक हेंडबुक में आयोजकों ने एक अमेरिकी सरकारी प्रतिबंध डेटाबेस का लिंक दिया जो बहुत विस्तृत था।
- अगर नियम वैसा ही रहता तो उन कंपनियों और संस्थाओं के शोधकर्त्ता NeurIPS की peer review और पब्लिशिंग प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाते।
- आयोजकों ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्होंने गलती से एक व्यापक टूल का संदर्भ दे दिया था। नया पाठ केवल "Specially Designated Nationals and Blocked Persons" नामक सूची पर लागू होगा। यह सूची आमतौर पर आतंकवादी और अपराधी समूहों के लिए उपयोग होती है, न कि सामान्य कारोबारी या शैक्षणिक संस्थाओं के लिए।
- आयोजकों ने गलती का कारण कानूनी टीम और फाउंडेशन के बीच संचार का टूट जाना बताया।
चीनी प्रतिक्रिया और त्वरित बैकलैश
नियम की घोषणा के बाद चीन में कई अकादमिक समूहों ने निंदा की और कुछ ने भविष्य में NeurIPS में भाग लेने से हतोत्साहित किया। प्रमुख बातें:
- China Association of Science and Technology ने कहा कि वह NeurIPS में जाने के लिए चीनी शोधकर्ताओं को फंड नहीं देगा और वह वह फंड घरेलू या उन अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर खर्च करेगा जो चीनी शोधकर्ताओं के अधिकारों का सम्मान करते हैं।
- इस संगठन ने यह भी कहा कि 2026 के NeurIPS में प्रकाशित पेपर को अकादमिक उपलब्धि के रूप में नहीं गिना जाएगा जब भविष्य में फंडिंग का आकलन किया जाएगा।
- कम से कम छह विद्वानों ने area chair के निमंत्रण ठुकरा दिए और कई ने रिव्यूअर होने से मना किया। University of Illinois के Nan Jiang ने बताया कि उन्होंने 2020 से हर साल area chair की जिम्मेदारी निभाई है पर इस बार मना किया।
क्यों यह मामला बड़ा है
यह घटना सिर्फ एक नियम-मिसटेक नहीं है। इसके मायने हैं:
- लाखों डॉलर के शोध और हजारों पेपर्स सालाना NeurIPS से रिलेटेड हैं, और 2025 में करीब आधे पेपरों के पीछे चीनी पृष्ठभूमि वाले शोधकर्ता थे।
- टॉप चीनी विश्वविद्यालय और कंपनियां — उदाहरण के लिए Tsinghua और Alibaba — सम्मेलन में बड़ी मौजूदगी और अवार्ड्स रखती हैं।
- अगर चीनी शोधकर्ता और संस्थान बड़े वैश्विक मंचों से दूर हो गए तो दोनों तरफ के शोध और सहयोग पर असर पड़ेगा।
क्या कह रहे विशेषज्ञ
Paul Triolo, जो US-China रिश्तों की पढ़ाई करते हैं, का कहना है कि यह एक संभावित watershed पल हो सकता है। उनके विचार में NeurIPS जैसे मंचों पर चीनी शोधकर्ताओं की मौजूदगी अमेरिकी हितों के भी अनुकूल है, लेकिन कुछ अमेरिकी अधिकारियों की इच्छाएं अलगाव की दिशा में रही हैं, खासकर AI के संदर्भ में।
कई शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि NeurIPS की समृद्धि वैश्विक शोध समुदाय के संयुक्त प्रयासों और कुछ प्रायोजकों के योगदान पर निर्भर रही है, जिनमें से कुछ पर पहले प्रतिबंध रहे हैं। उन शोधकर्ताओं ने area chair होने से मना किया और आयोजन को समझाने की मांग की।
स्थिति अब कहां है और आगे क्या हो सकता है
- NeurIPS ने हेंडबुक अपडेट कर के गलत लिंक हटाया और नियम का दायरा संकुचित कर दिया।
- फिर भी यह विवाद दिखाता है कि बुनियादी AI शोध और वैश्विक राजनीति अब अलग रहना कठिन हो रहा है।
- भविष्य में यह संभावित है कि कुछ चीनी शोधकर्ता और संस्थान यूएस-आधारित सम्मेलनों और सहयोगों से दूरी बनाए रखें, जिससे वैश्विक शोध पारिस्थितिकी पर असर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
यह मामला एक साफ संकेत है कि AI शोध अब केवल तकनीकी चर्चा नहीं रह गया है। नियमों, क़ानूनी व्याख्याओं और राजनीतिक सतर्कता के कारण विज्ञान के पारंपरिक खुले आदान-प्रदान में खिंचाव दिख रहा है। NeurIPS ने जो गलती मानी और उसे सुधारा, पर चूक के तुरंत बाद का फीडबैक और नतीजे दोनों ही यह दर्शाते हैं कि आगे ऐसे झटके और भी गंभीर रूप ले सकते हैं।