बेलारूसी राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की उत्तरी कोरिया की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा का आगमन प्योंगयांग में हुआ, जहां दोनों राज्यों के बीच रिश्तों को मज़बूत करने की योजना है।

यात्रा का मकसद

बेलारूस की आधिकारिक समाचार एजेंसी के मुताबिक यह दो दिन की यात्रा उन क्षेत्रों की पहचान करने के लिए है जहाँ दोनों देशों का पारस्परिक हित और सहयोग संभव है। लुकाशेंको ने कहा कि "रिश्ते आगे बढ़ाने का समय आ गया है" और उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान एक "दोस्ती संधि" और लगभग दस समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

पिछला मिलन और औपचारिक आमंत्रण

किम जोंग उन और लुकाशेंको पहले सितंबर में बीजिंग में तियानमेन स्क्वायर पर आयोजित एक सैन्य परेड के दौरान मिले थे, जहाँ किम ने लुकाशेंको को प्योंगयांग आने का निमंत्रण दिया था। इस महीने किम ने लुकाशेंको को पत्र भेजकर पारंपरिक मित्रता और सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की इच्छा जताई। बेलारूस ने भी राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को सभी स्तरों पर बढ़ाने में दिलचस्पी जताई है।

सैन्य व राजनीतिक पृष्ठभूमि

  • रूस का समर्थन: दोनों देश रूसी आक्रामक नीति के समर्थन और यूक्रेन के मामले में रूस के साथ निकटता के कारण जुड़े हुए दिखते हैं।
  • सैन्य मदद और तैनाती: दक्षिण कोरियाई व पश्चिमी खुफिया स्रोतों का अनुमान है कि उत्तर कोरिया ने रूस को हजारों सैनिक, विशेषकर कुर्स्क क्षेत्र में, और तोपखाने के गोले, मिसाइलें व रॉकेट सिस्टम मुहैया कराए हैं।
  • विनिमय: विशेषज्ञों के अनुसार रूस से वित्तीय सहायता, सैन्य तकनीक, खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति मिलने से प्योंगयांग को चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है।

रूस-उत्तर कोरिया के रिश्ते

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2024 में उत्तर कोरिया का दौरा किया और दोनों देशों ने एक परस्पर सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत यदि एक देश पर हमला होता है तो दूसरे को सैन्य सहायता प्रदान करनी पड़ेगी। यह प्योंगयांग और मॉस्को के बीच और गहरे सैन्य एवं राजनीतिक रिश्तों का संकेत था।

मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध

उत्तर कोरिया पर मुख्य रूप से उसके परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल गतिविधियों और रूस के खिलाफ सैन्य समर्थन के कारण पश्चिमी प्रतिबंध हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन प्योंगयांग पर यातनाएं, सार्वजनिक फांसी, कैद शिविर, जबरन श्रम और अभिव्यक्ति व आवागमन पर प्रतिबंध के गंभीर आरोप लगाते हैं।

बेलारूस की स्थिति

  • बेलारूस ने 2022 में रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के समय रणनीतिक सहयोग में गहरा भाग लिया और कई मामलों में रूस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य किया।
  • लुकाशेंको ने तीन दशकों में देश में किसी भी विरोध को कड़ी नीतियों से दबाया है।
  • हालांकि हाल के महीनों में मिन्स्क ने कुछ कैदियों को रिहा किया है, इसमें इस महीने की शुरुआत में रिलीज किए गए लगभग 250 लोग भी शामिल हैं, परन्तु 2020 के बाद से दर्ज सैकड़ों राजनीतिक कैदी अभी भी जेलों में हैं।

अमेरिका का संदर्भ और आने वाले कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेलारूस के साथ संबंध सुधारने की कोशिश की है, कुछ प्रतिबंधों में ढील दी और देश को एक प्रकार के "शांति मंडल" में शामिल करने का संकेत दिया। ट्रम्प प्रशासन के दौरान किम जोंग उन से शिखर बैठकें भी हुईं, और अब यह चर्चा है कि अंतरराष्ट्रीय दौरे व मुलाकातों से रिश्तों में और क्या जुड़ सकता है।

अगले क्या होने की उम्मीद है

मुख्य रूप से यह यात्रा एक संकेत देती है कि दोनों नेता राजनीतिक और आर्थिक तौर पर निकटता बढ़ाना चाहते हैं। दोस्ती संधि और कई समझौतों की घोषणा से क्षेत्रीय भू-राजनीति में समायोजन हो सकता है, खासकर रूस के साथ संबंधों के परिप्रेक्ष्य में। मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय आलोचना इस बात पर असर डालते रहेंगे कि पश्चिम किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

संक्षेप में: प्योंगयांग में लुकाशेंको की यह पहली आधिकारिक यात्रा मास्टरो योजनाओं का हिस्सा दिखती है: रिश्ते औपचारिक करना, सैन्य और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना और रूसी-जुड़ाव को गहरा करना। सवाल यह है कि यह कदम क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को किस तरह प्रभावित करेगा।