खुलकर कहें तो मामला साधारण नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज के मामले में चीजें खुलकर लड़ने तक पहुंचती हैं, तो वह एक और महत्वपूर्ण जलमार्ग को भी निशाना बना सकता है: बाब अल-मानदब, जो लाल सागर का दक्षिणी मुहाना है और सुेज़ नहर के जरिए भूमध्य सागर का समुद्री रास्ता शुरू करवाता है।
ईरानी सूत्र क्या कह रहे हैं
Tasnim समाचार एजेंसी के हवाले से, जो अव्यवहारिक नहीं है और अक्सर रिवोल्यूशनरी गार्ड के करीब मानी जाती है, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सिर्फ़ हॉर्मुज तक सीमित नहीं रहेगा। उनके सैन्य सूत्र कहते हैं कि अगर दुश्मन किसी तरह की जमीन या नौसैनिक कार्रवाई करता है, तो ईरान ‘‘अनपेक्षित मोर्चे’’ खोल सकता है ताकि दुश्मन की लागत बढ़े और फायदा कम हो।
बाब अल-मानदब का महत्व
बाब अल-मानदब का जिक्र इसलिए जरूरी है क्योंकि यह समुद्री मार्ग व्यापार के लिहाज से बेहद अहम है। अगर यह बंद हो जाए तो जहाज़ों को अफ्रीका के चारों ओर लंबा चक्कर लगाने के अलावा कोई आसान रास्ता नहीं बचेगा, और सुेज़ नहर के जरिए यूरोप जाने वाली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
साफ आंकड़े
- यह लाल सागर और अरब सागर/इंडियन ओशन के बीच की चाबी तरह है।
- इसका नियंत्रण समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति दोनों पर प्रभाव डाल सकता है।
ईरान के लिए चुनौतियाँ
हकीकत में बाब अल-मानदब पर प्रभाव जमाना आसान नहीं होगा। यहाँ कुछ कारण हैं:
- दूरी: हॉर्मुज की तुलनात्मक निकटता की बजाय बाब अल-मानदब ईरान की सीमाओं से हजारों किलोमीटर दूर है।
- सैन्य प्रयास की जरूरत: पानी में खदानें लगाना या वायु और नौसैनिक हमले दिखाना होगा ताकि कैरगो जहाज़ों की यात्रा अस्थिर हो।
- उड़ान मार्ग: मिसाइलों या विमानों को मार करने से पहले दूसरे देशों के ऊपर से गुजरना पड़ सकता है, जिनमें सऊदी अरब शामिल हो सकता है।
हौथी सहयोग एक विकल्प
एक व्यवहारिक रास्ता हो सकता है यमन में सक्रिय हौथी समूह के साथ तालमेल। उनके पास सागर के किनारे पहुंच है और उन्हें दिए गए सहायता-स्त्रोतों के जरिए मिसाइल क्षमता मिल सकती है। फिर भी यह स्पष्ट नहीं है कि हौथियों की हमलावर क्षमता इतनी है कि वे बाब अल-मानदब पर नियमित यातायात रोक दें।
नतीजा क्या रहेगा
संक्षेप में, तेहरान की धमकी रणनीतिक संकेत देती है: अगर हॉर्मुज के मामले में सैन्य कदम उठे तो प्रभाव सिर्फ स्थानीय नहीं रहेगा। बाब अल-मानदब का निशाना व्यापारिक मार्गों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, लेकिन उसे अमल में लाने के लिए ईरान को जटिल और जोखिम भरी तैनाती करनी पड़ेगी।
नियमित पाठक नोट: यह सब कूटनीतिक और सैन्य गणना का खेल है। शब्दों में जवाब तेज हो सकते हैं, पर जमीन पर करने के लिए काफी संसाधन और जोखिम चाहिए।