मेटिस बोले: हम मुश्किल स्थिति में हैं

जेम्स मैटिस ने CERAWeek मंच पर साफ कहा कि स्थिति जटिल है। उन्होंने बताया कि उनके पास ज्यादा विकल्प नजर नहीं आ रहे हैं और फिलहाल दोनों पक्ष अपनी स्थितियों से हटने जैसा कुछ नहीं कर रहे। व्हाइट हाउस ने मैटिस की टिप्पणियों पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी।

ट्रंप का पांच दिन का विराम और तेल की कीमतें

ट्रंप ने ईरान के खिलाफ हमलों में पांच दिन का विराम घोषित किया ताकि बातचीत की कोशिश की जा सके। इस घोषणा के साथ ही तेल की कीमतें सोमवार को करीब $90 प्रति बैरल तक नीचे आईं। इस युद्ध के बाद से कीमतें लगभग $120 के आस-पास से नीचे $90 तक झूल चुकी हैं।

मेटिस का विश्लेषण: विमानों से अकेला शासन परिवर्तन संभव नहीं

मैटिस ने कहा कि भले ही अमेरिकी मिसाइलों ने ईरान के कुछ सैन्य लक्ष्यों को तबाह किया हो, इससे अमेरिका के रणनीतिक हितों की गांरटी नहीं बनी। उनका निष्कर्ष था कि फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे को अपनी जगह से हटा सकने की स्थिति में नहीं हैं।

मैटिस के शब्दों का सार: हवा से किये गए हमलों से अकेले कभी किसी शासन को बदलने का इतिहास नहीं है।

मुख्य बिंदु

  • दोनों तरफ से आगे हटने की क्षमता अभी सीमित है।
  • विमानों और मिसाइलों ने क्षति की है लेकिन दीर्घकालिक रणनीतिक लाभ सुनिश्चित नहीं हुए।

तेल उद्योग और होर्मुज़ की संभावित स्थायी मौजूदगी

तेल कंपनियों के प्रतिनिधि सम्मेलन में यह जानना चाहते थे कि प्रशासन कितने समय तक हमले जारी रखेगा। कुछ उद्योग प्रतिनिधियों ने गोपनीय बातचीत में कहा कि वे अमेरिका की स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में स्थायी मौजूदगी के पक्ष में झुके हुए थे, ताकि ईरान की टैंकरों पर किसी भी तरह की कार्रवाई की क्षमता खत्म की जा सके।

इन प्रतिनिधियों में से कुछ के लिए ट्रंप की बातचीत शुरू करने की घोषणा एक अचानक बदलाव जैसा था। एक अनाम तेल उद्योग अधिकारी ने कहा कि पिछले सप्ताह उद्योग की सोच थी कि अब कोई स्थायी समाधान ढूंढना होगा, और एक स्थायी सैन्य मौजूदगी पर चर्चा चल रही थी। उस संदर्भ में विराम की खबर आश्चर्यजनक थी।

ब्रुकिंग्स की सूज़ैन मैलोनी: स्थायी शांति की उम्मीद कम

ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की विदेशी नीति निदेशक सूज़ैन मैलोनी ने मंच से कहा कि यह विराम दीर्घकालिक शांति की गारंटी नहीं देता। उनके अनुसार अमेरिका और ईरान की बातचीत के लक्ष्यों में बहुत बड़ा अंतर है।

मैलोनी ने कहा कि ईरान की वार्ताओं से जुड़ी उम्मीदों में मुआवजा और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति तथा समर्थन का अंत शामिल होगा। यह नतीजे वाशिंगटन और फारस की खाड़ी के पड़ोसी देशों की नजर से असहनीय हो सकते हैं।

उनका निष्कर्ष: वर्तमान परिस्थितियों में बातचीत से बड़ी सफलता की संभावना कम दिखती है।

निष्कर्ष

सरल शब्दों में: फिलहाल का पांच दिन का विराम थोड़ी राहत दे रहा है और तेल की कीमतों पर असर दिखा है, पर दोनों पक्षों के बीच दूरी इतनी है कि कोई त्वरित या स्थायी समाधान नजर नहीं आता। मैटिस और अन्य विशेषज्ञ मानते हैं कि हमला बंद कर देना बिना रणनीतिक व्यवस्था के होर्मुज़ को कमजोर कर सकता है और दीर्घकालिक शांति की गारंटी नहीं देता।