अगर आप ठंडी बीयर के लिए बचत कर रहे थे तो संभल जाइए। वैश्विक तनाव और ईरान से जुड़ी गैस आपूर्ति की समस्या भारत में बीयर और पैकेजिंग की कीमतों को ऊपर धकेल सकती है। बड़ी ब्रुअर कंपनियों ने कच्चे माल की लागत बढ़ने और शिपिंग में देरी की शिकायत की है, जिससे उपभोक्ता और दुकानदार दोनों के लिए असर दिखाई देने लगा है।
समस्या क्यों हुई
ईरान के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण गैस और कच्चे माल की सप्लाई चेन पर दबाव पड़ा है। भारत विश्व में चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस आयातक है और मध्य पूर्व पर काफी निर्भर है। करीब 40% गैस क़तर से आती है। ईरानी हमलों ने कतर की एक्सपोर्ट क्षमता को आंशिक रूप से प्रभावित किया है, जिससे ग्लास फर्नेस और प्लास्टिक फैक्ट्रियों को चलाने वाली गैस मुश्किल से मिल रही है।
कौन-कौन प्रभावित होगा
- ग्लास बोतलें: Brewers Association of India के अनुसार ग्लास की कीमतें करीब 20% बढ़ गई हैं।
- कैन और एल्यूमिनियम: एल्यूमिनियम आपूर्ति में देरी के संकेत मिले हैं, जिससे कैन उत्पादन घट सकता है।
- कार्टन और पैकेजिंग: पेपर कार्टन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, और लेबल तथा टेप की कीमतें भी बढ़ीं हैं।
- बोतल निर्माता: कई ग्लास कंपनियों ने आंशिक या पूर्ण उत्पादन रोका है।
ब्रुअर्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरि ने कहा कि वे 12-15% के बीच कीमत बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और सदस्य कंपनियों से राज्य सरकारों के पास अलग-अलग तौर पर जाने को कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ उत्पादन आर्थिक रूप से अब टिकाऊ नहीं रहा।
नियम और बाजार का परिदृश्य
भारत में शराब और बीयर की बिक्री बढ़ी है, खासकर शहरों और युवा आबादी में। परंतु रिटेल कीमत बढ़ाने के लिए कई राज्यों की मंजूरी ज़रूरी होती है। लगभग दो-तिहाई राज्यों की अनुमति चाहिए, इसलिए जिन राज्यों में इजाज़त नहीं मिलेगी वहां आपूर्ति बनाए रखना मुश्किल होगा, एसोसिएशन ने चेतावनी दी है।
बाजार का आकार 2024 में करीब $7.8 बिलियन था और 2030 तक दोगुना होने की उम्मीद है। एकल कंपनी ही बाजार का बड़ा हिस्सा संभाले हुए है: Heineken लगभग आधा, जबकि Anheuser-Busch InBev और Carlsberg लगभग 19%-19% हर एक। छोटे ब्रांड भी मौजूद हैं, जैसे Bira और Simba।
फैक्ट्रियों की हालत और अन्य प्रभाव
फिरोजाबाद के Fine Art Glass Works के CEO नितिन अग्रवाल ने बताया कि गैस की कमी के कारण उन्होंने अपने ग्लास प्लेट उत्पादन को 40% घटा दिया है और कीमतें लगभग 17-18% बढ़ानी पड़ी हैं। उनके ग्राहक शराब कंपनियों के अलावा जूस और केचप बोतल बनाने वाली फर्में भी हैं।
यह समस्या सिर्फ बीयर तक सीमित नहीं है। बोतलबंद पानी के बाजार पर भी असर पड़ा है और कुछ उत्पादकों ने प्लास्टिक बॉटल और कैप की बढ़ती कीमतों के कारण कीमतें लगभग 11% बढ़ा दी हैं।
दक्षिण कोरियाई कंपनी Lotte Chilsung Beverage के एक एग्जीक्यूटिव ने कहा कि उनके पास प्लास्टिक बोतलों और कच्चे प्लास्टिक के लिए करीब तीन महीनों का स्टॉक है, लेकिन स्थिति गंभीर है।
ग्राहक क्या देख सकते हैं
- उत्पादन लागत बढ़ने पर कुछ ब्रुअर्स राज्यों में खुद ही कीमत बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
- यदि राज्य अनुमति नहीं देते तो उन राज्यों में आपूर्ति कम हो सकती है।
- गर्मियों में मांग बढ़ने के समय यह समस्या और स्पष्ट हो सकती है।
कुछ बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने इस बारे में मीडिया पूछताछ का जवाब नहीं दिया। कुल मिलाकर, अगर गैस और कच्चे माल की सप्लाई में राहत नहीं आई तो उपभोक्ताओं को महंगी बीयर और सीमित उपलब्धता दोनों का सामना करना पड़ सकता है।