नॉर्वे और अन्य नाटो देशों पर अमेरिका से रक्षा खर्च बढ़ाने का दबाव बना रहा है।
क्या हुआ?
नॉर्वे सरकार ने कहा है कि वह अपने रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद के 3.5% तक बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है ताकि बढ़ती सैन्य उपकरण लागत का सामना किया जा सके और यूक्रेन युद्ध से मिली सीख के मुताबिक तैयारियां तेज हों।
कितना और कब?
यह बढ़ोतरी अगले 10 वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 115 अरब नॉर्वेजियन क्रोनर होगी, जो करीब 11.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर आंकी गई है। यह कदम नाटो प्रतिबद्धताओं के अनुरूप फैला होगा।
सरकार की प्राथमिकताएं
सरकार ने कुछ स्पष्ट प्राथमिकताएं बताई हैं जिन पर यह अतिरिक्त बजट खर्च होगा:
- नई पनडुब्बियां और फ्रिगेट: जर्मनी से खरीदी गई पहली पनडुब्बी 2029 में मिलने की उम्मीद है। ब्रिटेन से खरीदे गए दो फ्रिगेट 2030 और 2032 में मिलेंगे।
- महत्वपूर्ण रक्षा अवसंरचना का उन्नयन: बुनियादी सुविधाओं और बुनियादी रक्षा ढांचे में सुधार पर जोर।
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताएं: इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में मजबूत होने की योजना।
- कम दूरी की वायु रक्षा और स्वायत्त सिस्टम: छोटे दुरी के वायु रक्षा सिस्टम और ड्रोन/स्वायत्त उपकरणों में निवेश।
यूक्रेन और भौगोलिक संदर्भ
सरकार ने स्पष्ट किया कि बढ़े हुए खर्च में यूक्रेन के समर्थन के लिए संसाधन भी शामिल होंगे। नॉर्वे का उत्तर-पूर्व में रूस के साथ सीमा साझा करने का तथ्य इस नीति को और मायने देता है।
कुछ देरी भी होंगी
रक्षा मंत्री तोरे सैंडविक ने कहा है कि बजट बढ़ने के बावजूद कुछ खरीदारी में देरी होगी। खासकर एंटी-बैलिस्टिक एयर डिफेंस सिस्टम और समुद्री निगरानी के ड्रोन खरीद पर देरी प्रस्तावित है।
सरकार का संदेश
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक लंबी अवधि की योजना है जिसमें संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं, लेकिन प्राथमिकताओं को ध्यान से तौलकर ही कदम उठाए जाएंगे ताकि नॉर्वे की रक्षा क्षमता जल्दी और प्रभावी तरीके से मजबूत हो सके।
संक्षेप में: नॉर्वे अगले एक दशक में रक्षा पर बड़ा निवेश करने जा रहा है। लक्ष्य 3.5% जीडीपी के बराबर खर्च, 115 अरब क्रोनर का कुल इजाफा, नए जहाज और पनडुब्बियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध व एयर डिफेंस सुधार, और यूक्रेन को समर्थन शामिल है।