पिटवॉल पर हलचल, गैरेज में अफसोस

ऑस्ट्रेलियाई ग्रांड प्रिक्स में एस्टन मार्टिन ने एक ऐसा पल दिया जो टीम के कम्युनिकेशन प्रोसेस की नाजुकता भी उजागर कर गया और दर्शकों को कुछ हँसी-ठिठोली के मौके भी मिल गए। टीम के ट्रैकसाइड चीफ टेक्निकल अॉफिसर ने खुद माना कि Fernando Alonso के लेप 11 के पिट-स्टॉप के दौरान चीजें गड़बड़ा गईं।

क्या हुआ?

  • अलोनसो को रेस के लेप 11 में पिट बुलाया गया।
  • पहले यही माना जा रहा था कि कार को वाइब्रेशन समस्याओं के चलते रिटायर कर दिया गया है, क्योंकि pre-season में इसी से टीम परेशान थी।
  • कुछ मिनट बाद AMR26 को फिर ट्रैक पर छोड़ा गया, लेकिन वह बाकी फील्ड से 11 लैप पीछे था।
  • आखिरकार अलोनसो रेस से रिटायर हो गए। टीम-mate Lance Stroll भी रिटायर हुए।

संक्षेप में, पिटवॉल पर जो होना चाहिए था और जो हुआ, उन दोनों में दूरी काफी थी।

क्रैक ने क्या कहा?

ट्रैकसाइड अधिकारी ने साफ कहा कि यह 'मेस' पिट गैरेज की तरफ से नहीं था, बल्कि पिटवॉल पर कम्युनिकेशन फेल हुआ। उनके शब्दों में, "कम्युनिकेशन सही तरह से क्रॉस-कम्यूनिकेट नहीं हुआ। चैनल बहुत हैं, और कभी-कभी चीजें गड़बड़ हो जाती हैं।"

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह एक तरह से लाइव एक्सपीरियंस था जिसे टीम ने कम किया नहीं था, और पहला मौका मिला तो सब कुछ वैसा नहीं गया जैसा चाहिए था। बात साफ है: प्रैक्टिस और रियल टाइम में फर्क बड़ा होता है, और इस बार टीम को सख्त सबक मिला।

पार्ट्स की समस्या भी साथ में

पिट-स्टॉप ड्रामा के अलावा बड़ी समस्या यह भी रही कि टीम के पास अपने पावर यूनिट के लिए स्पेयर बैटरियाँ नहीं थीं। इसलिए जब रेस की शुरुआत में ही चीजें मुश्किल दिखी, तो टीम ने पार्ट्स बचाने की प्राथमिकता दी।

क्रैक ने कहा, "आखिरकार यह सब सामान्य ज्ञान है कि हमारे पास पार्ट्स की कोई भरमार नहीं है। उस स्थिति से ज्यादा हासिल नहीं होने वाला था, इसलिए हमने मिलकर पार्ट्स को सुरक्षित करने का फैसला लिया।"

रास्ता आगे का

फॉर्मूला 1 में गलती महंगी पड़ती है, खासकर जब टेक्निकल समस्याएँ और कम्युनिकेशन दोनों साथ हों। एस्टन मार्टिन और उसके पार्टनर Honda अब अपने अनरिलायबल एंट्री के समाधान खोज रहे हैं, और साथ ही टीम को पिटवॉल प्रोटोकॉल पर भी काम करना होगा ताकि अगली बार लाइव होने पर सब कुछ सुचारु चल सके।

तीखी सीख

  • कभी-कभी रेस सिर्फ ड्राइवरों की नहीं, सपोर्ट टीम की भी होती है।
  • ज्यादा चैनल मतलब ज्यादा गड़बड़ी का मौका—कम्युनिकेशन सिपाही चाहिए।
  • जब स्पेयर पार्ट्स कम हों, तो हर निर्णय प्यारा-सा कंजर्वेटिव दिखता है।

कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलियाई GP में यह घटना टीम के लिए शर्मनाक भी रही और सबक देने वाली भी। अगली बार जब पिटवॉल पर कोई आदेश दिया जाएगा, उम्मीद है कि वह साफ, तेज और सही टाइम में होगा।