कार्लसन की नई पेशकश, और हंगामा पुराना
टकर कार्लसन ने विवादित डॉक्यूमेंट्री The Bibi Files के स्ट्रीमिंग अधिकार खरीद लिए हैं। इसे उनकी Tucker Carlson Network, यानी TCN, पर उपलब्ध कराया गया है। कार्लसन, जो पहले Fox के प्रमुख चेहरों में रहे और आज भी Maga खेमे के कड़े समर्थक माने जाते हैं, लंबे समय से बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी सैन्य दखलंदाजी दोनों के आलोचक रहे हैं। इस बार उन्होंने फिल्म को ऐसे समय पर आगे बढ़ाया है जब अमेरिका की भूमिका, इज़राइल की राजनीति और ईरान से टकराव, सब एक ही बहस में घुलमिल गए हैं। क्या सुविधा है, राजनीति कम और शोर ज्यादा।
कार्लसन ने X पर लिखा कि यह फिल्म ऐसी कहानियां खोलती है जिन्हें नेतन्याहू सरकार छिपाकर रखना चाहती है। उनके मुताबिक इसमें भ्रष्टाचार के आरोप, संदिग्ध अंदरूनी सौदे, अमेरिका-विरोधी भू-रणनीतिक चालें और बहुत कुछ दिखाया गया है। उन्होंने इसे उस व्यापक अमेरिकी बहस से भी जोड़ा जिसमें ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच यह पूछा जा रहा है कि आखिर डोर किसके हाथ में है।
फुटेज, पूछताछ और इज़राइल में रोक
The Bibi Files का निर्देशन Alexis Bloom ने किया है और इसे Alex Gibney ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में 1000 घंटे से ज्यादा लीक हुए वीडियो फुटेज का इस्तेमाल किया गया है, जो 2016 से 2018 के बीच रिकॉर्ड किए गए थे। इनमें नेतन्याहू, उनकी पत्नी सारा और बेटे यायर की पुलिस पूछताछ के अंश भी शामिल हैं।
यही वजह है कि फिल्म इज़राइल में दिखाई नहीं जा सकती। वहां के कानूनी नियम पुलिस पूछताछ के ऐसे फुटेज को अदालत की अनुमति के बिना सार्वजनिक करने से रोकते हैं। फिल्म की इसी मनाही ने इसे और भी ज्यादा चर्चा में ला दिया। कार्लसन के हाथ में आते ही, जैसा अक्सर होता है, मामला और वायरल हो गया।
फिल्म में जिन सबसे तीखी आवाज़ों का इस्तेमाल किया गया है, उनमें पत्रकार और डॉक्यूमेंट्री निर्माता Raviv Drucker और नेतन्याहू के बचपन के दोस्त रहे Uzi Beller शामिल हैं, जो बाद में उनके मुखर आलोचक बन गए।
किन आरोपों पर फोकस है
डॉक्यूमेंट्री नेतन्याहू के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामलों पर केंद्रित है। इनमें धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामले, यानी Case 1000, 2000 और 4000, शामिल हैं। फिल्म यह संकेत देती है कि प्रधानमंत्री के कानूनी संकट और उनकी राजनीतिक, यहां तक कि सैन्य, नीतियों के बीच सीधा संबंध है। तर्क यह है कि घरेलू मुकदमों से ध्यान हटाने के लिए संकट की राजनीति उपयोगी साबित हो सकती है। बहुत आरामदायक निष्कर्ष नहीं है, लेकिन राजनीति अक्सर आरामदायक नहीं होती।
फिल्म यह भी दिखाती है कि नेतन्याहू पर महंगे उपहार लेने के आरोप हैं। इनमें Arnon Milchan से मिले कथित लग्जरी गिफ्ट, जिनमें सिगार और अन्य महंगे सामान शामिल बताए गए, प्रमुख हैं। Milchan हॉलीवुड के जाने-माने निर्माता हैं और आरोप है कि उन्होंने नेतन्याहू दंपति को सैकड़ों हजार डॉलर तक के तोहफे दिए।
इसके अलावा, फिल्म में इज़राइली अखबार Yedioth Ahronoth के मालिक Arnon Mozes के साथ कथित सौदेबाज़ी पर भी ध्यान दिया गया है, जिसके तहत नेतन्याहू के लिए अनुकूल कवरेज की बात उठती है। दूसरे शब्दों में, मीडिया भी इस कहानी में बस दर्शक नहीं था।
हमास को लेकर विवादित रणनीति
फिल्म का एक और बड़ा दावा यह है कि नेतन्याहू ने वर्षों तक हमास के लिए कतरी फंडिंग को परोक्ष रूप से बढ़ावा दिया, ताकि फ़िलिस्तीनी राजनीति बंटी रहे। New York Times के हवाले से इसमें कहा गया है कि क़तर से आने वाले अरबों डॉलर, करीब एक दशक में, मानवीय मदद के नाम पर गए, लेकिन आलोचकों के अनुसार उनका असर हमास को मजबूत करने वाला रहा।
फिल्म की दलील है कि इस तरह की नीति ने फतह को कमजोर किया और दो-राष्ट्र समाधान की संभावना को और दूर धकेल दिया। यानी, शांति की संभावना को बचाने के बजाय उसे कागज पर ही रहने दिया गया।
डॉक्यूमेंट्री में कुछ टिप्पणीकार 7 अक्टूबर को इसी दीर्घकालिक नीति की अप्रत्यक्ष परिणति के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि इज़राइल की सुरक्षा को ‘मैनेज’ करने की सोच ने हमास को एक स्थायी खतरे की तरह रहने दिया, और वही अंततः सबसे बड़े सुरक्षा विफलताओं में बदल गई।
एडेलसन दंपति और सारा नेतन्याहू
फिल्म में Miriam Adelson और उनके दिवंगत पति Sheldon Adelson के पूछताछ वाले फुटेज भी शामिल हैं। Sheldon, जो होटल और कैसीनो कारोबार के दिग्गज थे, 2021 में चल बसे। Miriam अभी भी अमेरिकी राजनीति में बेहद प्रभावशाली मानी जाती हैं और इज़राइल-समर्थक दान और अभियानों की प्रमुख चेहरा हैं। माना जाता है कि उन्होंने ट्रंप पर भी दबाव बनाया था कि हमास द्वारा अगवा किए गए इज़राइली बंधकों की रिहाई के लिए समझौता हो।
Miriam, जो तेल अवीव में जन्मी, हाइफा में पली-बढ़ीं और बाद में अमेरिकी नागरिक बनीं, Israel Hayom की संपादक भी हैं। यह इज़राइल का बड़ा अखबार है और देश के सबसे पढ़े जाने वाले अखबारों में से एक माना जाता है। डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक, नेतन्याहू दंपति इस अखबार से अपने पक्ष में नरम रुख की उम्मीद रखते थे।
फुटेज में Sheldon Adelson की सारा नेतन्याहू के बारे में काफी कठोर राय भी दिखाई देती है। एक पूछताछ में वे कहते हैं कि देश उनके बिना बेहतर होगा और वे उन्हें दोस्त नहीं मानते। दूसरी ओर, फिल्म में सारा के गुस्से वाले फोन कॉल, अखबार में नापसंद तस्वीरों पर आपत्तियां और लग्जरी उपहारों की अपेक्षाओं के संकेत भी दिखाए गए हैं। इनमें महंगे सिगार और Tiffany के गहनों का जिक्र आता है।
एक और तीखा अंश वह है जिसमें मिरियम यह स्वीकार करती दिखती हैं कि अगर यह फुटेज बाहर आया तो भारी नुकसान होगा। इससे रिश्तों की गहराई भी दिखती है और उनकी नाजुकता भी। जो एक समय करीबी गठजोड़ था, वह अंततः असहनीय हो गया।
पृष्ठभूमि में माफ़ी की राजनीति
यह डॉक्यूमेंट्री उस समय और महत्वपूर्ण हो जाती है जब याद दिलाया जाए कि नवंबर 2025 में नेतन्याहू ने राष्ट्रपति Herzog से औपचारिक रूप से माफ़ी की अपील की थी। यह कोशिश उनकी न्यायिक मुश्किलों से बाहर निकलने का रास्ता तलाशती दिखी। ट्रंप ने भी पहले Herzog से माफ़ी देने की अपील की थी।
कार्लसन के जरिए यह फिल्म अब सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री नहीं रही। यह नेतन्याहू की सत्ता, इज़राइली राजनीति, अमेरिकी दक्षिणपंथ और युद्ध-नीति पर एक नया विवाद बन गई है। फिल्म का दावा है कि नेतन्याहू ने उपहारों, एहसानों, मीडिया सौदों और राजनीतिक चालों के जरिए अपनी ताकत बनाए रखी। और आलोचकों के मुताबिक, इसी प्रक्रिया में इज़राइल की सुरक्षा भी दांव पर लगती चली गई।
यानी मामला सिर्फ एक नेता के कानूनी संकट का नहीं है। यह उस तंत्र का भी है जिसमें पैसा, मीडिया, सत्ता और युद्ध एक ही कमरे में बैठकर बातचीत करते दिखते हैं। और हां, कमरे में अब कार्लसन भी मौजूद हैं।