किसने क्या कहा
तालिबान की सरकार ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि उसकी वायु कार्रवाई ने रात में नागरिक घरों को निशाना बनाया, जिनमें राजधानी काबुल में चार लोगों और पूर्वी प्रांतों में दो लोगों की मौत हो गई। तालिबान ने कहा कि मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।
घटना का तर्जुमा
सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि पाकिस्तानी विमान कंदहार एयरपोर्ट के पास निजी एयरलाइन काम एयर के ईंधन गोदामों पर भी हमला कर रहे थे। दूसरी ओर पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि उन्होंने काबुल और सीमा प्रांतों में चार "आतंकवादी ठिकानों" पर सफल हवाई हमला किया और कंदहार एयरपोर्ट पर तेल भंडार को नष्ट कर दिया।
एक आम इंसान की दास्तां
29 साल के मजदूर अब्दुल वाahid ने बताया कि करीब 12:10 बजे उसकी और चार परिवार के सदस्यों की छत पर बम गिरा। उन्होंने कहा कि अचानक शोर हुआ, ईंटें ऊपर से गिरने लगीं और महिलाएं व बच्चे मलबे के नीचे दब गए। दस मिनट तक उन्हें निकालने में देर लगी। वे और उनके परिवार के सदस्य घायल होकर क्लिनिक ले जाए गए।
दावों का टकराव
- तालिबान: नागरिक मकानों पर हवाई हमले और नागरिक हताहत।
- पाकिस्तान: नागरिकों को निशाना नहीं बनाया गया। उन्होंने चार आतंकवादी ठिकानों और तेल के गोदाम को नष्ट करने का दावा किया।
- अल्फ़ाज़ और सत्यापन: दोनों पक्षों के हताहत आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल है।
पूर्वघटनाएं और बड़ा परिप्रेक्ष्य
लड़ाई 26 फरवरी को तेज हुई जब अफगानिस्तान ने सीमा पर हमला किया, जिसमें उसने कहा कि यह पहले हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों का जवाब था। कुछ ही दिन बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ा क्योंकि संयुक्त राज्य और इजराइल के कार्रवाइयों ने क्षेत्रीय युद्ध की आग को और हवा दी।
मानवीय और सांख्यिकीय Toll
- तालिबान के अनुसार, मंगलवार से अब तक अफगान इलाकों में कम से कम सात लोगों की मौत की खबरें आईं।
- संयुक्त राष्ट्र मिशन ने कहा कि 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई में 56 नागरिक मारे गए, जिनमें 24 बच्चे शामिल हैं।
- पाकिस्तानी अधिकारियों ने लगभग 12 सैनिकों की मौत और 27 घायल होने की पुष्टि की है। तालिबान ने दावा किया है कि उसने 150 से अधिक सैनिक मार दिए।
- यूनाइटेड नेशन के अनुसार लगभग 115,000 लोग अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं।
कहानी का सार
यही स्थिति है: दोनों तरफ आरोप-प्रत्यारोप, जान-माल का नुकसान और दर्ज किए गए विस्थापन। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम की अपील की, पर जमीन पर स्थितियां ऐसी बनी हुई हैं कि अपीलें फिलहाल असर दिखाती नहीं दिखतीं।
छोटी सी जुबानी नसीहत: जब बयानों में बड़े दावे और विरोधी आंकड़े सामने हों तो सच तक पहुंचने के लिए स्वतंत्र जांच और तटस्थ स्रोतों की जरूरत और बढ़ जाती है।