लेक्लर का गुस्सा: नियमों ने क्वालिफाइंग को उलझन भरा बना दिया
सुज़ुका में क्वालिफाइंग के बाद चार्ल्स लेक्लर ने टीम रेडियो पर साफ शब्दों में अपनी नाराज़गी बताई। फ़ेरारी ड्राइवर जापान ग्रैंड प्रिक्स में चौथे स्थान से शुरू करेंगे, लेकिन क्वालिफाइंग के परिणाम से वे निराश दिखे।
समस्या क्या है?
- इस सीज़न के नए नियमों की वजह से एक लैप पर ऊर्जा प्रबंधन जटिल हो गया है।
- जब ड्राइवर कोनों में पूरी तरह पैंतरेबाज़ी करके तेजी दिखाने की कोशिश करता है, तो कार की सीधे रफ्तार घट जाती है।
- नतीजा यह होता है कि अधिक आक्रामक होकर कोनों में तेज होने से कुल लैप टाइम धीमा पड़ सकता है।
- इसके उलट, सीमाओं के भीतर लगातार और संतुलित ड्राइविंग करना अब फायदेमंद साबित हो रहा है।
ये तरीका सॉर्ट में समझने में उल्टा-सुल्टा लगता है और यही नई F1 युग पर काफी आलोचना का कारण बना है।
लेक्लर ने क्या कहा?
क्वालिफाइंग के तुरंत बाद टीम रेडियो पर आठ बार ग्रैंड प्रिक्स जीतने वाले ड्राइवर ने अपनी झल्लाहट जताई: "मैं इन नियमों को मत सिखाइए, क्वालिफाइंग में मैं इन नियमों को बर्दाश्त नहीं कर सकता। ये एक बकवास मजाक है! मैं कोनों में तेज़ जाता हूँ, पहले थ्रॉटल लगाता हूँ, और सीधी पर सब कुछ खो देता हूँ!"
उनका गुस्सा चीन में भी दिख चुका था, और जापान में क्वालिफाइंग के बाद उन्होंने फिर वही असमंजस और निराशा ज़ाहिर की।
क्या बदलेगा?
- ड्राइवरों और टीमों की शिकायतें नियम निर्माणकर्ताओं तक जा रही हैं, लेकिन फिलहाल सिस्टम वैसा ही काम कर रहा है।
- मुकाबला अब उस टीम और ड्राइवर के पक्ष में रहेगा जो ऊर्जा प्रबंधन और समंजित ड्राइविंग में बेहतर हो।
निष्कर्ष
लेक्लर का खुला गुस्सा बताता है कि नए नियमों ने क्वालिफाइंग की परिभाषा बदल दी है और कई ड्राइवर इसे खेल की समझ के खिलाफ मानते हैं। सुज़ुका में उनका चौथा स्थान संकेत देता है कि रफ्तार दिखाने और सही ऊर्जा संतुलन के बीच संतुलन पाना अब और मुश्किल हो गया है।