स्मार्ट ग्लासेस का नया और बहुत ही 'रचनात्मक' उपयोग
दुनिया भर में पिछले कुछ वर्षों में कई कंपनियों ने स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च किए हैं। कुछ चश्मे रोज़मर्रा की ज़िंदगी रिकॉर्ड करने, फोन कॉल लेने या हेडफ़ोन की जगह इस्तेमाल करने के लिए बनाए गए हैं। कुछ में एआई टूल इतने भरे हुए हैं कि खाना बनाने से लेकर यात्रा तक में मदद का दावा किया जाता है। तकनीक का दायरा बढ़ा है, और उसके साथ सुरक्षा और निजता की चिंताएँ भी।
इन चश्मों को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह रही है कि लोग अक्सर बिना जाने रिकॉर्ड किए जा सकते हैं। आलोचकों ने यह भी कहा है कि निजी सामग्री की समीक्षा इंसानों द्वारा की जाती है, यानी कोई न कोई आपके बेहद निजी पलों को देख सकता है। बहुत प्रगति हुई, बेशक।
अब चीन में इस तकनीक का एक और इस्तेमाल सामने आया है। कुछ छात्र स्कूल के टेस्ट के दौरान स्मार्ट ग्लासेस पहनकर जवाब हासिल कर रहे हैं।
टेस्ट में नकल के लिए किराये पर चश्मा
यह जानकारी Rest of World की रिपोर्ट से सामने आई, जिसने इन चश्मों के उपयोगकर्ताओं से बात की। हेबेई की एक यूनिवर्सिटी छात्रा विवियन ने आउटलेट से कहा, “जिस भी विषय में मैं फेल हो सकती हूँ।”
हालांकि विवियन का असली नाम यह नहीं है, उसने बताया कि वह Rokid AI ग्लासेस का इस्तेमाल केवल पढ़ाई या नकल के लिए नहीं, बल्कि कपड़ों के टैग स्कैन करके यह देखने के लिए भी करती है कि कहीं वे दूसरी जगह सस्ते तो नहीं मिल रहे।
उसने यह भी स्वीकार किया कि वह ये चश्मे दूसरे छात्रों को किराये पर देती है, ताकि वे टेस्ट में बढ़त हासिल कर सकें।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह किराये का बाजार अब बड़ा धंधा बन चुका है। लोग इन ग्लासेस का इस्तेमाल इंग्लिश और मैथ्स के टेस्ट में नकल करने के लिए कर रहे हैं। एक व्यवसायी ने सिर्फ पिछले चार महीनों में 1,000 से ज़्यादा लोगों को ये चश्मे किराये पर दिए हैं।
नियम हैं, लेकिन जांच हर जगह नहीं
बड़े और महत्वपूर्ण परीक्षाओं में इन चश्मों पर रोक है। समस्या यह है कि हर बार शिक्षक इन्हें ठीक से जांचते नहीं हैं। नतीजा यह कि छात्र इन्हें पहनकर अंदर चले जाते हैं और एआई से जवाब निकलवा लेते हैं। शिक्षा व्यवस्था में अचानक ईमानदारी की भारी मांग नहीं, बल्कि शायद थोड़ी सख्त जांच ज़्यादा काम आए।
ऐसे हालात में नकल रोकने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की ज़रूरत पड़ेगी। वरना स्मार्ट ग्लासेस का अगला बड़ा उपयोग शायद पढ़ाई नहीं, परीक्षा पास करना ही रहेगा।