मध्यम-पूर्व में जारी लड़ाई ने तेल आपूर्ति पर ऐसा असर डाला है जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अब तक के सबसे बड़े व्यवधान के रूप में बताया है। सरल भाषा में: गल्फ के प्रमुख उत्पादक देशों ने उत्पादन घटाया है और वैश्विक आपूर्ति में बड़ी कमी आई है।
कितनी कमी हुई है?
एजेंसी का कहना है कि कच्चे तेल का उत्पादन कम से कम 8 मिलियन बैरल प्रति दिन घट गया है। साथ ही पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और कंडेंसैट्स के रूप में लगभग 2 मिलियन बैरल प्रति दिन और फंसे हुए हैं। कुल मिलाकर यह संख्या विश्व की मांग के लगभग 10% के बराबर बैठती है। हां, यह काफी बड़ी गिरावट है।
IEA ने क्या किया?
स्थिति को काबू में रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने वैश्विक रणनीतिक स्टॉक से 400 मिलियन बैरल एक समन्वित रिलीज के रूप में बाजार में डालने की सिफारिश की। एजेंसी के निदेशक ने कहा कि यह कदम बाजारों पर गहरा असर डाल चुका है और वैश्विक ऊर्जा बाजार अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। यह कार्रवाई 1970 के बाद के सबसे बड़े प्रकार की हस्तक्षेपों में से एक मानी जा रही है।
अब कीमतें क्या कर रही हैं?
स्टॉक्स खोलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट का भाव $100 प्रति बैरल के ऊपर चला गया। रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट करीब $100.50 और अमेरिकी WTI लगभग $94.92 पर था, दोनों में तेज उछाल देखा गया। यानी स्टॉक्स खोल दिए गए, पर निवेशक अभी भी आपूर्ति को लेकर चिंतित हैं।
IEA के सदस्यों में 32 देश हैं, जिनमें G7 देश भी शामिल हैं। प्रमुख योगदान में संयुक्त राज्य अमेरिका का हिस्सा बड़ा है: वे लगभग 172 मिलियन बैरल देंगे, जो उनके आरक्षित स्टॉक्स का लगभग 40% है। ये अमेरिकी बैरल धीरे-धीरे अगले करीब तीन महीनों में बाजार में आएंगे।
होरमुज़ जलसंधि का खतरा
होरमुज़ की सुरक्षा के मुद्दे गंभीर हैं। हालिया घटनाओं और टैंकरों के सुरक्षात्मक पहलुओं में बदलाव के कारण यह खतरनाक संभावना बढ़ रही है कि यह प्रमुख मार्ग अस्थायी या दीर्घकालिक तरीके से बंद हो सकता है। अगर होरमुज़ बंद हुआ तो वैश्विक ऊर्जा निर्यात पर गहरा असर पड़ेगा क्योंकि यह दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है।
तेल के अलावा क्या-क्या प्रभावित हो रहा है?
होरमुज़ के बंद होने से सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं रुक रहा, बल्कि कुछ औद्योगिक कच्चे माल की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। विशेषकर जाया हुआ ध्यान सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड पर गया है, जो उर्वरक, अर्धचालक निर्माण, निकेल रिफाइनिंग और तांबे के प्रसंस्करण में जरूरी हैं।
- ग्लोबल समुद्री रूप से भेजे जाने वाले सल्फर का लगभग आधा हिस्सा होरमुज़ के रास्ते से निकलता है।
- गल्फ क्षेत्र में सल्फर का बड़ा हिस्सा उन कच्चे तेलों का उप-उत्पाद है जिन्हें 'एसिडिक कच्चा' कहा जाता है।
- कुछ बाजारों में सल्फर की कीमतें हाल के दिनों में करीब 15% तक बढ़ चुकी हैं।
सरल शब्दों में: अगर आप उर्वरक खरीदते हैं, चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों की कोई खबर पढ़ते हैं या तांबे की कीमतों पर नजर रखते हैं, तो यह सब एक दूसरे से जुड़ा हुआ है और होरमुज़ में होने वाली बाधा इन चीजों पर असर डाल सकती है।
निष्कर्ष: बाजार फिलहाल एक संवेदनशील मोड़ पर है। वैश्विक स्टॉक्स खोलकर कुछ राहत दी गई है, पर आपूर्ति में व्यवधान और प्रमुख जलमार्गों की अनिश्चितता ने कीमतों और आपूर्ति आश्वासनों पर दबाव बना रखा है। यह संकट 1970 के दशक के तेल शॉक्स जैसा गंभीर माना जा रहा है और आगे के कुछ महीने तय करेंगे कि स्थिति कितनी जल्दी स्थिर होती है।
टिप्पणी: ये आंकड़े और फैसले बदलते घटनाक्रम पर आधारित हैं। ऊर्जा बाजार में तेजी से उतार-चढ़ाव आते हैं, इसलिए अगर आप निवेश या खरीदारी की सोच रहे हैं तो हालात पर नजर बनाए रखें।