संक्षेप में: ईरानी फुटबॉल संघ ने साफ़ कहा है कि टीम 2026 फीफा विश्व कप से बाहर नहीं होगी। फिर भी वे अमेरिका में होने वाले अपने समूह मैचों का बॉयकॉट करने की घोषणा कर रहे हैं और फ़ीफ़ा से उन मैचों को मैक्सिको में कराने की मांग कर रहे हैं।

टीम की तैयारी और मौजूदा कार्यक्रम

टीम मेल्ली ने विश्व कप के लिए क्वालीफाई पहले ही कर लिया था। टूर्नामेंट 11 जून से 19 जुलाई तक चलेगा और यह संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा में सह-आयोजित है। अभी ईरान को अपनी शुरुआत के तीनों ग्रुप मैच अमेरिका में खेलने हैं।

ईरानी फुटबॉल फ़ेडरेशन (FFIRI) के अध्यक्ष मेहदी ताज ने कहा है कि टीम तुर्की में प्रशिक्षण शिविर चला रही है और वहां दो मैत्रीपूर्ण मुकाबले खेले जाएंगे। इसके अलावा टीम मार्च 27 को नाइजीरिया और चार दिन बाद अंटाल्याके मुकाबले में कोस्टा रिका से खेलेगी। यह मुकाबला एक चार-राष्ट्रीय आमंत्रण टूर्नामेंट का हिस्सा है, जो मध्य-पूर्व के तनाव के कारण जॉर्डन से तुर्की शिफ्ट हुआ था।

अमेरिका का बहिष्कार, मैक्सिको विकल्प

ताज ने साफ शब्दों में कहा: "हम अमेरिका का बहिष्कार करेंगे, लेकिन हम विश्व कप का बहिष्कार नहीं करेंगे।" उनका तर्क यह है कि कुछ राजनीतिक बयानों और सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिका में खेलने पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए वे फ़ीफ़ा से मैचों को मैक्सिको में बदलने का अनुरोध कर रहे हैं।

मैक्सिकन राष्ट्रपति क्लॉडिया शेइनबॉम ने बताया कि उनका देश जून में ईरान के मैच—जो उनके ग्रुप विरोधी न्यूज़ीलैंड, बेल्जियम और मिस्र हैं—को आयोजित करने के लिए खुले विचार रखता है। परन्तु अंतिम निर्णय फ़ीफ़ा का होगा।

महिला टीम और अस्थायी ठहराव

ईरान की महिला राष्ट्रीय टीम एशियाई कप के लिए ऑस्ट्रेलिया गई थी। वहाँ की मेजबान सरकार ने सुरक्षा चिंताओं के कारण सभी प्रतिनिधि मंडल को शरण देने का प्रस्ताव रखा। सात सदस्यों ने शरण स्वीकार किया, लेकिन अंततः केवल दो ही वहीं रुके। ताज ने तुर्की से वापसी के दौरान सीमा पर महिला खिलाड़ियों का स्वागत करते हुए यह बात कही।

अमेरिका से जुड़ी प्रतिक्रियाएँ और फ़ीफ़ा की भूमिका

अमेरिका के राष्ट्रपति ने पहले कहा कि खिलाड़ियों को शरण देने का आग्रह किया गया था और यह भी कहा कि ईरानी पुरुष खिलाड़ी अमेरिका में खेल सकते हैं पर उनके जीवन और सुरक्षा के बारे में सावधानी बरतनी चाहिए। इस बयान का हवाला लेकर ताज ने स्थान परिवर्तित कराने की मांग औपचारिक तौर पर रखी।

फ़ीफ़ा ने कहा है कि वह FFIRI के संपर्क में है और उसने प्रतिभागियों से उम्मीद जताई है कि सभी टीमें 6 दिसंबर 2025 को घोषित मैच शेड्यूल के अनुसार खेलेंगी।

FIFPRO के एशिया पैसिफिक प्रमुख बोय बुश ने कहा कि फ़ीफ़ा की जिम्मेदारी है कि वह विश्व कप में शामिल हर व्यक्ति की सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे। उनका कहना था कि फ़ीफ़ा को व्यापक मानवाधिकार प्रभाव आकलन करना चाहिए ताकि सभी खिलाड़ियों और दर्शकों की सुरक्षा की गारंटी दी जा सके और जोखिमों की पहचान कर उन्हें कम किया जा सके।

अगले कदम क्या हो सकते हैं

  • FFIRI और फ़ीफ़ा के बीच चर्चा जारी है; किसी भी स्थल परिवर्तन का अंतिम निर्णय फ़ीफ़ा करेगा।
  • यदि मैचों को मैक्सिको में स्थानांतरित किया जाता है तो ईरान अमेरिका में खेले बिना भी टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकेगा।
  • फ़ीफ़ा की सुरक्षा और मानवाधिकार समीक्षा घटनाक्रम और फ़ैसलों पर असर डाल सकती है।

नतीजा यह है कि फिलहाल ईरान प्रतियोगिता से बाहर नहीं हो रहा, पर उसकी हिरासत यह है कि वह अमेरिका में खेलना पसंद नहीं करता। फैसले का अंतिम असर आने वाले हफ्तों में फ़ीफ़ा के संवाद और संभावित स्थान परिवर्तन पर निर्भर करेगा।