ट्रंप की नई धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति से आए एक नए युद्धविराम अनुरोध को खारिज कर दिया है। उसी सांस में उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की मुक्त आवाजाही बहाल नहीं होने दी, तो अमेरिका ईरान को “पत्थर युग” में वापस भेज देगा।

ट्रुथ सोशल पर लिखते हुए ट्रंप ने कहा कि “ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति” ने, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया कि वे अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में “काफी कम कट्टर” और “कहीं अधिक बुद्धिमान” हैं, अमेरिका से “युद्धविराम” मांगा है।

ट्रंप ने लिखा, “हम तब विचार करेंगे जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य खुला, मुक्त और साफ होगा। तब तक हम ईरान को तबाह कर रहे हैं, या जैसा वे कहते हैं, पत्थर युग में वापस।”

तेहरान की तरफ से इनकार

ट्रंप जिन ईरानी नेता की बात कर रहे थे, उनकी पहचान पूरी तरह साफ नहीं थी। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान 2024 से इस पद पर हैं। तेहरान ने उन रिपोर्टों से इनकार किया है जिनमें कहा गया था कि एक महीने से अधिक पहले शुरू हुए संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमलों में उनकी मौत हो गई थी।

ट्रंप हाल के दिनों में कई बार अज्ञात ईरानी नेताओं से संपर्क का दावा कर चुके हैं, लेकिन तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है। बुधवार को ईरानी राज्य टेलीविजन ने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के युद्धविराम अनुरोध वाले दावे को “झूठा और आधारहीन” बताया।

अराघची ने मंगलवार को अल जज़ीरा से कहा कि तीसरे देशों के माध्यम से कुछ अप्रत्यक्ष संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है और उन्होंने यह भी कहा कि वे ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से अब भी संदेश प्राप्त करते हैं।

लेकिन अराघची ने जोर देकर कहा कि ऐसे संपर्क किसी भी तरह की “बातचीत” नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे [अमेरिकी विशेष दूत स्टीव] विटकॉफ से सीधे, पहले की तरह, संदेश मिलते हैं, और इसका मतलब यह नहीं कि हम बातचीत कर रहे हैं।”

“ईरान में किसी भी पक्ष के साथ बातचीत होने का दावा सच नहीं है। सभी संदेश विदेश मंत्रालय के जरिए भेजे जाते हैं या वहीं प्राप्त होते हैं, और सुरक्षा एजेंसियों के बीच भी संचार है।”

उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच “विश्वास स्तर शून्य” है, खासकर विटकॉफ के साथ पिछले एक साल में हुई कूटनीति की दो दौर की वार्ताओं के बाद, जिनका अंत अमेरिकी हवाई हमलों के साथ हुआ।

अराघची ने कहा, “हमें यह भरोसा नहीं है कि अमेरिका के साथ बातचीत से कोई नतीजा निकलेगा... हमें ईमानदारी नहीं दिखती।”

होर्मुज़ पर दबाव और बाजारों की चिंता

ट्रंप का यह बिना पुष्टि वाला दावा कि उन्हें ईरान से युद्धविराम का अनुरोध मिला और उन्होंने उसे ठुकरा दिया, उनके उस प्राइमटाइम संबोधन से कुछ ही घंटे पहले आया, जिसमें वे युद्ध पर बोलने वाले हैं। यह तब हुआ जब वे होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और वहां सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय बल जुटाने में नाकाम रहे।

ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरा जलमार्ग दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लगभग पांचवें हिस्से के लिए अहम चोकपॉइंट है। पिछले महीने ट्रंप के शुरू किए गए युद्ध में यह इलाका मुख्य केंद्र बन गया, जब ईरान ने उन मालवाहक जहाजों पर हमले शुरू किए जो उसके मुताबिक अमेरिका या इज़राइल से जुड़ी समुद्री आवाजाही का हिस्सा थे।

ट्रंप की यह पोस्ट अमेरिकी बाजार खुलने से 45 मिनट पहले, यानी पूर्वी समयानुसार सुबह 8:44 बजे आई। समय भी कम दिलचस्प नहीं था। दुनिया भर के वित्तीय बाजार महीने भर से चल रहे हवाई युद्ध से हिल चुके हैं, और इसकी बड़ी वजह ईरान का होर्मुज़ पर प्रभावी नियंत्रण है।

यूरोपीय सहयोगियों पर दबाव, नाटो पर तंज

ट्रंप ने पहले अमेरिकी नौसैनिक जहाजों से इस अहम जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को एस्कॉर्ट कराने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने वह वादा पूरा नहीं किया। इसके बजाय वे बार-बार अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों पर दबाव डालते रहे कि वे समुद्री अभियान के लिए नौसैनिक सहायता दें, ताकि जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सके।

ब्रिटेन और फ्रांस सहित कई अमेरिकी सहयोगियों ने बहुराष्ट्रीय बल में रुचि दिखाई है, लेकिन यूरोपीय नेताओं, जिनमें ब्रिटिश प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर भी शामिल हैं, ने साफ कहा है कि ऐसी किसी कार्रवाई की शुरुआत तब तक नहीं हो सकती जब तक अमेरिका और इज़राइल अपना युद्ध खत्म नहीं करते।

इसके जवाब में ट्रंप ने नाटो सदस्यों पर बार-बार हमला बोला है कि वे युद्ध प्रयास में शामिल नहीं हो रहे, जबकि उन्होंने अभियान शुरू करने से पहले अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोई ठोस कोशिश भी नहीं की थी।

उन्होंने 32 सदस्यीय गठबंधन को “पेपर टाइगर” कहा और यह भी दावा किया कि नाटो सदस्यों द्वारा उनकी मांगों को न मानना इस बात का सबूत है कि यह गठबंधन एकतरफा है। तथ्य यह है कि गठबंधन ने अपने इतिहास में उत्तरी अटलांटिक संधि के पारस्परिक रक्षा प्रावधान को सिर्फ एक बार सक्रिय किया, वह भी 11 सितंबर 2001 के न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन हमलों के बाद अमेरिका की रक्षा के लिए।

बुधवार को ट्रंप ने द टेलीग्राफ से कहा कि अमेरिका को गठबंधन से बाहर निकालने पर अब “पुनर्विचार से परे” स्थिति बन चुकी है।

उन्होंने यह भी कहा कि उसी शाम अपने संबोधन में वे नाटो के प्रति अपनी “घृणा” जताएंगे और वे “पूरी तरह” यह सोच रहे हैं कि क्या अमेरिका को गठबंधन से बाहर किया जाए, जबकि अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को कांग्रेस की मंजूरी के बिना ऐसा करने से रोकता है।

युद्ध खत्म होने की उनकी अपनी टाइमलाइन

Reuters से अलग बातचीत में ट्रंप ने कहा कि युद्ध खत्म होने से पहले अमेरिका के पास “कुछ और लक्ष्य” बाकी हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान “परमाणु हथियार नहीं रखेगा क्योंकि अब उसमें ऐसा करने की क्षमता नहीं है।”

उन्होंने कहा, “और फिर मैं निकल जाऊंगा, और सबको साथ ले जाऊंगा, और अगर जरूरत पड़ी तो हम वापस आकर सटीक हमले करेंगे।”

ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि उन्हें “परमाणु सामग्री की परवाह नहीं” है और अमेरिका “काफी जल्दी” ईरान से बाहर होगा। इससे यही संकेत मिलता है कि क्षेत्र में सैन्य अभियान जल्द खत्म होने वाला है, जबकि जमीनी हमले की खबरों का दावा अलग दिशा दिखाता रहा है।