संक्षेप में: रिपोर्टों के मुताबिक मार्क जुकरबर्ग के लिए एक AI एजेंट तैयार किया जा रहा है जो उनकी सीईओ जिम्मेदारियों में मदद करेगा। इसका मकसद जानकारी जुटाना और रोज़मर्रा की टीम कम्युनिकेशन को कम करना है।

क्यों अब यह चल निकला?

जुकरबर्ग की कंपनी मेटा पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर AI पर दांव लगा रही है। पहले मेनिफेस्टिशन रहा मेटावर्स, जिसमें अरबों डॉलर खर्च हुए और उम्मीद के मुताबिक काम नहीं बना। साथ ही कंपनी के स्मार्ट ग्लासेज पर भी शिकायतें आईं, जिनकी वीडियो समीक्षा से विवाद पैदा हुआ। अब मेटा एक कदम आगे जाकर ऐसे टूल्स बना रहा है जो लोगों के बीच सीधी बातचीत घटा दें और काम AI के जरिए हो जाए।

AI एजेंट असल में क्या करेगा?

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक यह एजेंट जुकरबर्ग को सूचना हासिल करने और निर्णय के लिए जरूरी डेटा जुटाने में मदद करेगा। मतलब, परंपरागत तरीके से किसी कर्मचारी से पूछने की जगह AI से सीधे जानकारी लेना। अभी के स्तर पर इसकी भूमिका इन्फॉर्मेशन रिट्रीवल और संदर्भ प्रदान करने तक सीमित दिखती है।

जुकरबर्ग की दलील

जुकरबर्ग ने अपनी आय कॉल में कहा कि वे AI-नेटिव टूल्स में निवेश कर रहे हैं ताकि मेटा के कर्मचारी ज्यादा काम कर सकें और टीमों को फ्लैट बनाया जा सके। उनका मानना है कि इससे वर्कफ़्लो बेहतर होगा और काम करने का अनुभव भी बेहतर रहेगा।

मेरी-हथियार: मेटा के अंदर के टूल

मेता के इंजीनियर और कर्मचारी कुछ इंटर्नल टूल्स बना रहे हैं जिनके नाम और काम कुछ इस तरह हैं:

  • My Claw - यह टूल सहकर्मियों और उनके एजेंट्स से बात कर सकता है और कर्मचारी फाइल्स तथा चैट लॉग्स का संदर्भ ले सकता है।
  • Second Brain - एक कर्मचारी ने इसे डिज़ाइन किया है ताकि यह प्रोजेक्ट डॉक्यूमेंटेशन को पार्स करके एक तरह का AI चीफ ऑफ स्टाफ बन सके।

ये टूल इस सोच पर काम कर रहे हैं कि सीधी मानव बातचीत कम करने से संगठन में कार्य कुशलता बढ़ेगी।

AI एजेंट एक दूसरे से भी बात करेंगे

मेता के आंतरिक मैसेज बोर्ड पर अब एक ऐसा ग्रुप है जहां कर्मचारियों के AI एजेंट आपस में बातचीत करते हैं। यह AI-एजेंट्स का सामाजिक नेटवर्क जैसा माहौल पैदा कर रहा है। हाल ही में मेटा ने Moltbook नामक एक प्लेटफार्म भी खरीदा और उसके संस्थापकों को नौकरी पर रखा। इस प्लेटफार्म के वायरल पोस्ट्स पर बाद में पता चला कि कई बार असल में मानव उपयोगकर्ताओं ने AI कंटेंट को प्रभावित किया था।

क्या यह ChatGPT से बेहतर सलाह देगा?

यह सवाल खुला है। कुछ मामलों में ChatGPT जैसी सेवाओं ने नेताओं को गलत रास्ते पर ला खड़ा किया है। इसलिए यह देखना बाकी है कि जुकरबर्ग का अपना AI सलाह और फैसलों में कितना सही और विश्वसनीय साबित होगा।

नतीजा: संगठनात्मक बदलाव और नौकरी का खतरा

AI को कामकाज का प्राथमिक माध्यम बनाने की योजना का एक पहलू यह भी है कि मेटा अपने कर्मचारी ढांचे में बदलाव कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी संभावित रूप से अपनी कुल जनशक्ति का तकरीबन 20% छंटनी करने की योजना बना रही है।

निचोड़

मेता AI को अंदर से बदलने की कोशिश कर रहा है: टीम स्ट्रक्चर फ्लैट करना, AI-इंजीनियरिंग को बढ़ावा देना और ऐसे इंटरनल एजेंट्स बनाना जो सीधे इंसानों की जगह ले सकें। यह सब जुकरबर्ग की उस विजन का हिस्सा है जिसमें AI बुनियादी माध्यम बनकर काम करे। हालांकि, टेक और एथिक्स पर सवाल बने हुए हैं, और यह भी साफ नहीं है कि यह रणनीति कर्मचारियों और उपयोगकर्ताओं के लिए किस तरह परिणाम देगी।