बीजिंग में दो सत्र के दौरान कई सरकारी अधिकारियों की तरह दर्जनों सैन्य अधिकारी भी मौजूद नहीं थे। सबसे खामोश नामों में से एक हैं जनरल झांग यौशिया, जिन पर जनवरी के आखिरी हिस्से से "गंभीर नियम और कानून उल्लंघन" की संदेहास्पद जांच चल रही है, जैसा कि चीनी राज्य न्यूज़ एजेंसी ने बताया।

शी की पुरानी मुहिम, नया विस्तार

शी जिनपिंग ने 2012 में सत्ता संभालते ही व्यापक anticorruption अभियान शुरू किया था। तब से यह अभियान ऊंचे दर्जे के "टाइगर" और निचले स्तर के "फ्लाईज़" दोनों को निशाना बनाता आया है। अब यह कार्रवाई फिर से तेज हुई लगती है और इस बार सेना के और अधिक हिस्सों को कवर कर रही है।

किसे छुआ जा रहा है

  • केवल सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के सदस्य नहीं, बल्कि परिचालन कमांडर, राजनीतिक कमिश्नर और सेना के विभिन्न थिएटर कमांडर भी जांच के सामने आए हैं।
  • विश्लेषकों का कहना है कि अब खाली पड़ी कई ऊँची पदस्थियों की वजह व्यापक पुनर्मूल्यांकन और जांच है, न कि सिर्फ स्थानीय इकाईयों की कोई एक गलती।

अभियान का औपचारिक कारण और समयबद्धता

चीन की आधिकारिक मिलिट्री अखबार ने हाल में लिखा कि भ्रष्टाचार "लड़ाकू क्षमता को खोखला करने वाला सबसे बड़ा कैंसर" है। इसी तर्ज पर पीएलए की हालिया रिपोर्ट में भ्रष्टाचार से लड़ना अन्य प्राथमिकताओं जैसे "राजनीतिक सुधार" और वफादारी सुनिश्चित करने के बराबर रखा गया है।

यह सब उस समय हो रहा है जब पीएलए अगस्त 2027 में अपनी 100वीं सालगिरह मनाने की तैयारी कर रही है और अपने लंबे आधुनिकिकरण अभियान की समीक्षा कर रही है।

कितने ऊँचे अफसर प्रभावित हुए?

एक अमेरिकी संस्थान के अनुमान के मुताबिक 2022 से अब तक करीब 100 वरिष्ठ अधिकारी या तो हटाए गए हैं या उनकी संभावित रूप से पृष्ठभूमि में जांच चल रही है। इसमें लगभग 36 जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल शामिल बताए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में 65 ऐसे अधिकारी बताए गए हैं जो महत्वपूर्ण बैठकों में अनुपस्थित थे और उन्हें "मिसिंग या संभावित रूप से हटाया गया" माना गया।

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं

  • कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान शी की लंबे समय से चली आ रही असंतोष और सैन्य प्रबंधन में सुधार की कोशिश का हिस्सा है।
  • दूसरे विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि हटाना केवल भ्रष्टाचार के कारण है तो यह संस्थागत समस्याओं की ओर संकेत कर सकता है; यदि राजनीतिक कारण अधिक हैं तो यह शीर्ष पर निष्ठा को लेकर बीजिंग की चिंताओं का संकेत है।
  • कठोर परिवर्तन से केंद्रीय नियंत्रण मजबूत हो सकता है, पर इससे सैन्य भीतर मनोबल और भरोसे पर असर भी पड़ सकता है।

ताइवान और सैन्य तैयारियों पर असर

सैन्य नेतृत्व में बदलावों को ताइवान में ध्यान से देखा जा रहा है। बीजिंग ने खुले तौर पर कहा है कि वह ताइवान को शांति या बल से जोड़ने की नीति का समर्थन करता है। कुछ पूर्व अमेरिकी सैन्यों के अनुमानों में यह कहा गया है कि पीएलए 2027 तक ताइवान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने के काबिल हो सकता है।

सरकारी वर्क रिपोर्ट में ताइवान पर फोकस बनाए रखने का संकेत भी दिखा, जिसे कुछ विशेषज्ञों ने यह बताते हुए पढ़ा कि बीजिंग को लगता है कि वे फायदेमंद प्रवृत्ति में हैं और वे एकीकरण की तैयारी तेज करना चाहते हैं।

सैन्य गतिविधियाँ जारी रहीं

जबकि शीर्षकमों की सफाई हो रही है, पीएलए की अभ्यास और तैयारियाँ रुकती नहीं दिखीं। पूर्व में "जस्टिस मिशन 2025" जैसे अभ्यास हुए और 2026 में भी संयुक्त युद्धयोग्यता गश्त और ग्रे जोन गतिविधियाँ जारी रहीं। इससे विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सैन्य प्रशिक्षण और संचालन में बड़ा व्यवधान नहीं दिखता।

निष्कर्ष: शी की भ्रष्टाचार मुहिम अब सेना के शीर्ष तक पहुंच चुकी है और इसका असर संगठनात्मक पुनर्गठन, नेतृत्व अस्थिरता और ताइवान नीति पर बढ़ते दबाव के रूप में दिख रहा है। हालाँकि अभ्यास और संचालन जारी हैं, पर नेतृत्व में लगातार बदलाव सैन्य भीतर अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं।