यूक्रेन अपने ड्रोन रक्षा ज्ञान को मध्य पूर्व के साथ साझा करता है
एक ऐसे कदम में जो कूटनीति और युद्ध-क्षेत्र की तकनीक को एक साथ मिलाता है, कीव ने कहा कि उसने पिछले सप्ताह जॉर्डन में अमेरिकी बेसों की रक्षा के लिए इंटरसेप्टर ड्रोन और ड्रोन विशेषज्ञों की एक टीम भेजी है। यह घोषणा तब आई है जब यूक्रेन गल्फ और मध्य-पूर्व के शक्तिशाली देशों के साथ गर्म संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है, जो ईरान के ड्रोन समूहों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता का सामना कर रहे हैं।
राष्ट्रपति व्लादिमिर ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के पास स्थित देशों के साथ-साथ यूरोपीय राज्यों और संयुक्त राज्य अमेरिका से 11 अनुरोध थे, और उन अनुरोधों में से कुछ ठोस कार्रवाई और समर्थन के रूप में परिणत हुए। जॉर्डन के अनुरोध के एक दिन के भीतर एक यूक्रेनी टीम रवाना हो गई, जबकि वाशिंगटन क्षेत्र में रक्षा को मजबूत करने के लिए अपने सहयोगियों पर दबाव बना रहा है।
खबरों के अनुसार जॉर्डन बेस पर यूएस-थाड रक्षा व्यवस्था में प्रयुक्त एक रडार सिस्टम ईरानी हमलों से नुकसान दिखा रहा था, जो इस युद्ध-काल में क्षेत्रीय हवाई रक्षा क्यों अहम है, यह रेखांकित करता है।
कीव के एक थिंक-टैंक विश्लेषक ने इसे अमेरिकी और अन्य सहयोगियों के लिए यूक्रेन की उपयोगिता साबित करने के तौर पर देखा, ताकि बदले में सद्भावना और रणनीतिक सहयोग पाया जा सके, और वह कठोर-कमाई ड्रोन-युद्ध ज्ञान साझा कर रहे हों।
ज़ेलेंस्की ने स्वीकार किया कि ईरान और रूस के बीच मित्रवत लिंक हैं और मॉस्को नेTeहरान के साथ लक्षित करने की जानकारी साझा करने की सूचना दी है। अगर ये संबंध बने रहते हैं, तो उनका जवाब और अधिक विशेषज्ञों और इंटरसेप्टरों को भेजना होगा ताकि बेसों की रक्षा हो सके और क्षेत्र की ऊर्जा व जल संरचना की सुरक्षा की जा सके अगर जरूरत हो।
पिछले एक हफ्ते में यूक्रेन के राष्ट्रपति ने खाड़ी और मध्य-पूर्व के नेताओं के साथ भी बातचीत की है, जिनमें सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन शामिल हैं, और यूरोप व मध्य पूर्व के बीच संयुक्त सुरक्षा योजना के महत्व पर बल दिया है।
क्या भेजा गया और यह क्यों मायने रखता है
यूक्रेन ने 2024 के अंत के बाद से Shahed ड्रोन की लहरों का सामना किया है और बड़े समूहों को रोकने के लिए कम-लागत, प्रभावी हवाई रक्षा क्षमताएं विकसित की हैं। कीव ने धमकी के साथ मुकाबला करने के लिए सस्ते इंटरसेप्टर और जमीन-आधारित मार्गदर्शन के मिश्रण पर निर्भर किया है, ऐसी रणनीति जो पेट्रीयट मिसाइलें और THAAD प्रणालियों पर भारी निर्भर रहने वाले गल्फ देशों से भिन्न है।
अधिकारियों ने कहा कि उपकरणों में इंटरसेप्टर ड्रोन और जमीन से मार्गदर्शन करने वाले ऑपरेटरों की एक टीम शामिल है, जो contested airspace में ड्रोन के प्रवेश पर तेज प्रतिक्रिया सक्षम बनाती है।
खर्च, क्षमताएं और व्यापक प्रभाव
- ड्रोन की लागत: Shahed ड्रोन लगभग ५०,००० डॉलर प्रति ड्रोन होते हैं, जबकि Patriot इंटरसेप्टरों की कीमतें अरबों डॉलर तक जाती हैं।
- इंटरसेप्टर ड्रोन: कीव ने कम-लागत इंटरसेप्टरों की दावेदारी की है जिन्होंने हाल के संघर्षों में उच्च अवरोध दरें दी हैं, जिनमें बड़े समूहों को प्रभावी ढंग से गिराने के मामले भी शामिल हैं।
- Patriot इन्वेंटरी वास्तविकताएं: विश्लेषक हाल के दिनों में Patriot मिसाइलों के भारी इस्तेमाल पर प्रकाश डालते हैं, जिससे क्षेत्रीय स्टॉकपाइल और सप्लाई चेन पर सवाल उठते हैं।
संख्याओं को संदर्भ में रखने के लिए, यूक्रेन ने अपने कुछ ड्रोन और इंटरसेप्टरों की वहन क्षमता पर प्रकाश डाला है, बड़े ड्रोन आक्रमणों के साथ ताल मिलाने की निरंतर चुनौती को दर्शाते हुए, जबकि पश्चिमी हवाई रक्षा सप्लाई लाइनों में अड़चन से बचना भी जरूरी है।
विशेषज्ञ राय और आगे क्या होगा
अनुसंधानकर्ता और सुरक्षा विश्लेषक कहते हैं कि कीव यह संकेत दे रहा है कि वह एक व्यावहारिक, हालांकि असामान्य, रक्षा भागीदार बन सकता है ऐसी क्षेत्र में जहाँ गठबंधनों की परीक्षा हो रही है और ड्रोन खतरा पार-राष्ट्रीय है। ड्रोन रक्षा के लिए यूक्रेन का दृष्टिकोण—खर्च-प्रभावी, स्केलेबल समाधान पर जोर—एक व्यापक प्रवृत्ति के अनुरूप है जिसमें सहयोगियों के साथ रणनीतिक कौशल साझा कर कूटनीतिक मजबूती प्राप्त की जाती है।
आगे देखते हुए, कीव कहता है कि वह क्षेत्रीय साझेदारों के साथ समन्वय जारी रखेगा ताकि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा हो सके, और इस प्रकार के विनिमय को एक व्यापक सुरक्षा कूटनीतिक प्रयास के हिस्से के रूप में आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।
निष्कर्ष
ड्रोन-डिप्लोमेसी में यूक्रेन का नवीनतम कदम यूरोप की प्रायःभूमि पर शुरू हुआ युद्ध अब मध्य पूर्व के आकाशों से होकर गुजर रहा है, यह दिखाता है। यह मिशन इस बात को रेखांकित करता है कि ड्रोन युद्ध ने न सिर्फ लड़ाई के मोर्चों को बदला है बल्कि उसके पीछे की कूटनीति भी नए आयाम गढ़ रहा है।