एक अमेरिकी संघीय जज ने पेंटागन को ऐसे नियम थोपने से रोका है जो कुछ पत्रकारों के मिलिट्री हेडक्वार्टर तक पहुंच को सीमित करते थे। यह फैसला न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा दायर मुकदमे के पक्ष में आया, जिसमें कहा गया था कि कई प्रावधान अवैध हैं और प्रेस के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

फैसले की मुख्य बातें

  • रोक लगाई गई: जज पॉल फ्राइडमैन ने पेंटागन के उन नियमों को लागू करने से रोका जो उन रिपोर्टरों के क्रेडेंशियल्स पर असर डालते थे जिन्होंने नियमों को मानने से इनकार करके बिल्डिंग छोड़ दी थी।
  • संवैधानिक अधिकारों का हवाला: जज ने कहा कि नीति पहले और पाँचवें संशोधन के तहत मुक्त भाषण और उचित प्रक्रिया के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
  • हुक्म: सात टाइम्स पत्रकारों के क्रेडेंशियल्स बहाल करने का आदेश और चुनौती किए गए प्रावधानों को रद्द करना, जो सभी नियमित पक्षों पर लागू होगा।
  • अदालत की कार्रवाइयां: पेंटागन द्वारा एक सप्ताह के लिए निर्णय रोकने की मांग खारिज कर दी गई और उसे एक सप्ताह के अंदर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया।

न्यायाधीश ने क्यों कहा कि नीति दोषपूर्ण है

जज पॉल फ्राइडमैन, जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने नामांकित किया था, ने लिखा कि नीति पत्रकारों को यह स्पष्ट सूचना नहीं देती कि कौन सी सामान्य और कानूनी रिपोर्टिंग प्रथाएँ उनके क्रेडेंशियल्स के निलंबन या निरस्तीकरण का कारण बन सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नीति का उद्देश्य उन पत्रकारों को बाहर करना प्रतीत होता है जिन्हें विभाग पसंद नहीं करता और उनकी जगह उन लोगों को बैठाना है जो सरकार के साथ सहमत हैं। जज ने इसे स्पष्ट रूप से विचार-आधारित पक्षपात बताया।

न्यायाधीश ने सुरक्षा की आवश्यकता कबूल की, पर लिखा कि ‘‘देश की हालिया वेनेज़ुएला में कार्रवाई और ईरान के साथ जारी संघर्ष के परिप्रेक्ष्य में यह और भी महत्वपूर्ण है कि जनता को विभिन्न दृष्टिकोणों से जानकारी मिलती रहे।’’

टाइम्स की प्रतिक्रिया

न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रवक्ता ने कहा कि यह निर्णय देश में स्वतंत्र प्रेस के संवैधानिक अधिकारों को लागू करता है और कि अमेरिकी लोगों को यह जानने का अधिकार है कि सरकार और सेना उनके नाम और उनके करों से क्या कर रही है।

टाइम्स के वकील थियोडोर बूटρους ने कहा कि अदालत का फैसला पेंटागन की उस कोशिश की कड़ी निंदा है जिसका इरादा प्रेस की आजादी रोकना और युद्ध के समय जरूरी जानकारी को जनता तक पहुंचने से रोकना था।

पेंटागन का पक्ष और उसका बचाव

पेंटागन ने तर्क दिया कि यह नीति ‘‘सामान्य समझ’’ वाले नियम हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी जानकारी के खुलासे से सेना की रक्षा करती हैं। सरकार के वकीलों ने लिखा कि प्रक्रिया का लक्ष्य उन लोगों को रोकना है जो सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकते हैं ताकि उन्हें सैन्य मुख्यालयों तक व्यापक पहुंच न मिले।

टाइम्स की साइड ने आरोप लगाया कि नीति का असली उद्देश्य प्रशासन के खिलाफ नकारात्मक कवरेज को दबाना है और सरकार को ऐसी असीम शक्ति देना है कि भाषा के बहाने आत्म-सीनसर्शिप उत्पन्न हो सकती है।

नियमों का असमान लागू होना: उदाहरण

अदालत ने पेंटागन द्वारा नियमों के असंगत अनुप्रयोग का उदाहरण भी लिया। न्यायालय ने नोट किया कि एक ट्रम्प समर्थक मीडिया शख्सियत लॉरा लूमर, जिन्होंने नीति स्वीकार की थी, ने अपनी "टिप लाइन" का प्रचार किया लेकिन पेंटागन ने उस पर आपत्ति नहीं जताई। वहीं एक प्रमुख अखबार की टिप लाइन को नीति का उल्लंघन माना गया क्योंकि उसे लक्ष्य-निर्धारित बताया गया।

जज ने कहा कि दोनों टिप लाइनों में कोई महत्वपूर्ण फर्क नहीं दिखता और नीति कुछ भी स्पष्ट रूप से रोकती नहीं कि विभाग समान व्यवहार करे या न करे।

निष्कर्ष

अदालत का आदेश न केवल सात टाइम्स पत्रकारों के क्रेडेंशियल्स बहाल करने तक सीमित है बल्कि चुनौती किए गए प्रावधानों को सभी प्रभावित पक्षों के लिए लागू नहीं रहने का निर्देश देता है। पेंटागन को एक सप्ताह में दिखाना होगा कि वह आदेश का पालन कैसे कर रहा है।

यह मामला प्रेस की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय सुरक्षा के दावों और सरकार के नियम बनाने के दायरे के बीच संतुलन की बहस को और तेज कर देता है।