सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में स्पष्ट कर दिया था कि फोन कंपनियों से किसी व्यक्ति का लोकेशन डेटा हासिल करने के लिए कानून अपारदर्शी तरीके से नहीं किया जा सकता और उसके लिए वारंट चाहिए। पर यह नियम एक रास्ता छोड़ देता है: बाजार में मौजूद डेटा ब्रोकर। ये कंपनियाँ मोबाइल और अन्य स्रोतों से जमा की गई जानकारी बेच देती हैं, और फेडरल एजेंसियाँ वे जानकारी खरीद रही हैं।
क्या मुद्दा है
सरल शब्दों में, जब फोन कंपनियों से सीधा डेटा लेने पर वारंट चाहिए होता है, तब एजेंसियाँ वही या मिलती-जुलती जानकारी डेटा ब्रोकरों से खरीदकर पा लेती हैं। इस तरह की खरीद को लेकर कई सांसद चिंतित हैं और इसे रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं।
कौन-क्या पेश कर रहा है
- संसद में बिल: सीनटर रॉन वाइडन और सीनटर माइक ली ने 13 मार्च को Government Surveillance Reform Act पेश किया।
- बिल का मकसद: यह बिल संघीय कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को निर्देश देगा कि वे अमेरिकियों की निजी जानकारी खरीदने से पहले वारंट प्राप्त करें।
- हाउस में भी कदम: प्रतिनिधि जो ज़ो लॉफग्रेन और वॉरेन डेविडसन ने हाउस में समान प्रस्ताव रखा है।
सुनवाई में क्या बोला गया
सीनटर वाइडन ने कहा कि बिना वारंट खरीदना संविधान के चौथे संशोधन का बचकर निकलना जैसा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के चलते बड़े निजी डेटासेट को जांचना और भी खतरनाक बन गया है।
कमेटी चेयर टॉम कॉटन ने इस अभ्यास का बचाव किया। उनका तर्क था कि यह जानकारी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध है और अगर कोई भी व्यक्ति उसे खरीद सकता है तो FBI भी खरीदकर अपराधियों का पता लगाने में सक्षम होगा। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों पर अपराध करने वालों या नशीली संगठनों के नेताओं को पकड़ने में मदद मिल सकती है।
डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के डायरेक्टर जेम्स एडम्स ने भी सुनवाई में बताया कि उनकी एजेंसी भी व्यावसायिक रूप से उपलब्ध जानकारी खरीदती है।
सार
मुद्दा यह है कि कानूनी रूप से फोन कंपनियों से लोकेशन डेटा निकालने पर सुरक्षा प्रक्रियाएँ लागू हैं, पर बाजार में उपलब्ध डेटा के कारण वही जानकारी बिना वारंट के भी हासिल की जा सकती है। कुछ सांसद इस व्यवहार को वैधानिक रूप से रोकना चाहते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अपराध निवारण के लिए यह उपयोगी है।
इस विषय पर आगे के कानून और सुनवाई तय करेंगे कि अमेरिका में निजता और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे रखा जाए।