बात इतनी गंभीर है कि एक बड़ी रिपोर्ट सीधे कह रही है: अमेरिका अब वही नहीं रहा
गोतेनबर्ग यूनिवर्सिटी का V-Dem (Varieties of Democracy) संस्थान अपनी वार्षिक रिपोर्ट में साफ कहता है कि अमेरिका तेज़ी से स्वेच्छाचारिता की तरफ जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यह गिरावट इतनी तेज़ है कि यह हंगरी और तुर्की जैसी जगहों से भी आगे निकल चुकी है।
V-Dem की बेटी-लाइनों वाले आंकड़े क्या दिखाते हैं?
उनके पास 48 अलग-अलग संकेतक हैं, जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मीडिया की स्थिति, चुनावों की गुणवत्ता और कानून का पालन।
इन संकेतकों का मिलाकर निकाला गया लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स बताता है कि अमेरिका में लोकतंत्र का टूटना आधुनिक इतिहास में अभूतपूर्व है।
रिपोर्ट कहती है कि 1965 के बाद का जो लोकतांत्रिक स्तर था, वह अब घटकर सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
मुख्य कारण: राष्ट्रपति पद में शक्ति का तेज़ी से एकत्रीकरण
V-Dem के संस्थापक स्टैफन लिंडबर्ग का कहना है कि हाल के वर्षों में कार्यपालिका शाखा में शक्ति का इतना केंद्रीकरण हुआ है कि कांग्रेस और न्यायपालिका के पारंपरिक चेक्स एंड बैलैंस खतरे में हैं। रिपोर्ट में कुछ प्रमुख बिंदु ये हैं:
ट्रम्प के पहले साल में 225 कार्यकारी आदेश पारित हुए, जबकि रिपब्लिकन नियंत्रित कांग्रेस ने केवल 49 नए कानून बनाए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई कार्यकारी आदेश महत्वपूर्ण थे, कुछ सरकारी विभागों को बंद करने और बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को निकालने तक का मामला सामने आया।
उच्चतम न्यायालय ने भी कई बार अपनी भूमिका सीमित कर दी है और जब अदालतों ने आदेशों को रोकने की कोशिश की तब उन्हें दरकिनार करने के भी प्रयास हुए। रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प प्रशासन के विरुद्ध 600 से अधिक न्यायिक मामलों की प्रक्रिया चल रही है।
आंतरिक निगरानी करने वाले इंस्पेक्टर जनरल और वरिष्ठ नागरिक अधिकारियों को हटाकर उनकी जगह वफादार लोगों को बैठाने का चलन भी दिखाई देता है। यह वही तरीका है जो हंगरी और तुर्की में इस्तेमाल हुआ था।
विश्व स्तरीय तस्वीर: एक साथ कई देशों में लोकतंत्र कमजोर हुआ
V-Dem का कहना है कि दुनिया भर में लोकतंत्र 1970 के दशक के मध्य के स्तर तक पीछे चला गया है। रिपोर्ट बताती है कि अब तक रिकॉर्ड 41% यानी करीब 3.4 अरब लोग ऐसे देशों में रहते हैं जहाँ लोकतंत्र घट रहा है। और चौंकाने वाली बात यह है कि इस वैश्विक रुझान में वाशिंगटन का नेतृत्व भी शामिल है।
यूरोप की तस्वीर और यूनाइटेड किंगडम
रिपोर्ट में यूरोप के कई देशों का भी ज़िक्र है। सात यूरोपीय संघ के सदस्य राज्यों को ऑटोक्टैटाइज़ेशन प्रभावित कर रहा है: हंगरी, ग्रीस, क्रोएशिया, स्लोवेनिया, स्लोवाकिया, इटली और रोमानिया। पुर्तगाल और बुल्गारिया को वॉचलिस्ट में रखा गया है।
V-Dem ने यूनाइटेड किंगडम को भी एक "नया ऑटोक्ट्राइज़र" बताया है। वहां अभिव्यक्ति और मीडिया की स्वतंत्रता में गिरावट और कुछ हालिया कानूनों के कारण चिंता बढ़ी है।
कहीं कोई उम्मीद की किरण?
रिपोर्ट एक अच्छी खबर भी देती है: चुनाव अभी भी स्वतंत्र और खुलकर हो रहे हैं और चुनाव प्रणाली फिलहाल स्थिर बनी हुई है। पर खतरे मौजूद हैं।
चुनावों से जुड़े अधिकारियों और पैम-वर्कर्स पर दबाव बढ़ा है। रिपोर्ट में मीडिया रिर्पोट्स का हवाला देकर कहा गया है कि 2020 के बाद से लगभग 40% चुनाव/पोल वर्कर्स नौकरी छोड़ चुके हैं, जो चुनाव प्रशासन के लिए चिंताजनक है।
ट्रम्प की लोकप्रियता 40% से नीचे बताई जा रही है और कुछ समर्थकों में युद्ध और महंगाई के चलते असंतोष दिखाई दे रहा है। कुछ राज्यों ने नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक और स्थानीय लड़ाइयों में सफल वापसी भी की है।
V-Dem कैसे इतना भरोसेमंद बन गया?
V-Dem की टीम खुद को शोध-आधारित और व्यापक डेटा पर काम करने वाला बताती है। उनके पास 1789 से 2025 तक के 202 देशों और क्षेत्रों के लिए करोड़ों डेटा पॉइंट्स हैं। संस्थान का दावा है कि उनके पास वैश्विक मानक और साथ ही स्थानीय स्तर पर जानकारी देने वाले रिसर्चर भी हैं।
रिपोर्ट का संदेश साफ है
V-Dem की भाषा में यह चेतावनी है कि लोकतांत्रिक संस्थाएँ कमजोर हो रही हैं और जब भी चरम-दाएँ ताकतें सत्ता में आती हैं तो संस्थानों को तोड़ने का जोखिम बढ़ जाता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह सिर्फ अमेरिका की किस्मत नहीं है; यह एक वैश्विक प्रवृत्ति है।
संक्षेप में: V-Dem की रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका में लोकतंत्र तेजी से पीछे हट रहा है, मुख्य कारण राष्ट्रपति पद में शक्ति का केंद्रीकरण, संस्थागत निगरानी का खत्म होना और अभिव्यक्ति व नागरिक अधिकारों में गिरावट हैं। विश्व स्तर पर भी लोकतंत्र दबाव में है और यूरोप के कुछ देशों में भी संकेत जोखिम वाले हैं।
क्या करना चाहिए?
रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट है कि लोकतन्त्र को बचाने के लिए पारदर्शिता, मजबूत संस्थान और नागरिक समाज की सक्रियता जरूरी है।
चुनावी प्रक्रिया और चुनाव कर्मियों की सुरक्षा मजबूत करना भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
V-Dem की चेतावनी गंभीर है। इसे नजरअंदाज करना आसान है पर परिणाम गंभीर होंगे।