खुलासा समय: YouTube अब टीवी पर 30-सेकंड के ऐसे विज्ञापन दिखा रहा है जिन्हें आप स्किप नहीं कर पाएंगे। अगर आपको लगता था कि इंटरनेट का सौजन्य आपको बचाएगा, तो यह आपकी हंसी उड़ाने आया है।

क्या बदल रहा है

YouTube ने घोषणा की है कि टीवी पर स्ट्रीमिंग करते समय प्लेटफॉर्म 6 सेकंड, 15 सेकंड और 30 सेकंड के विज्ञापन दिखाने के लिए एक तरह के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करेगा, और अब 30-सेकंड वाले ऐड अनस्किपेबल होंगे। हाँ, वही 30 सेकंड जो पहले कुछ सेकंड कटने पर स्किप हो जाते थे, अब मजबूती से आपके टीवी स्क्रीन पर टिके रहेंगे। फिलहाल यह बदलाव मुख्य रूप से YouTube TV अनुभव में दिखा है।

यह नया क्यों है?

बिजनेस लॉजिक बिल्कुल साफ है: ज्यादा दिखाओ, ज्यादा कमाओ। Google की मशीनें एड-लेंथ को मिलाकर दिखाकर एड-इन्कम बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। उपयोगकर्ता खुश हैं या नहीं, इससे फर्क नहीं पड़ता अगर बैंक अकाउंट खुश है।

पिछले कुछ अपडेट्स की झलक

  • पिछले साल से प्लेटफॉर्म ने गेम्स में रियलिस्टिक वायलेंस वाले कंटेंट पर नई पॉलिसी लागू की थी।
  • उम्मीद है कि उम्र का अनुमान लगाने वाली नई सुविधाएं भी कुछ उपयोगकर्ताओं के अनुभव को बदल रही हैं।
  • YouTube ने कुछ सब्सक्रिप्शन पैक में अधिक विज्ञापन डाल दिए, जैसे कि Premium Lite में भी ऐड बढ़ना देखा गया।
  • मिड-रोल विज्ञापनों को उस जगह लगाने के लिए नए नियम आए जहाँ प्लेटफॉर्म सोचता है कि दर्शक कम परेशान होंगे।
  • इसके साथ-साथ adblockers पर सख्ती भी बढ़ी, और कभी-कभी यह सख्ती उलटी पड़कर उन उपयोगकर्ताओं को भी वीडियो देखने से रोक चुकी है जो वैध सब्सक्रिप्शन ले चुके थे।

यूजर रिएक्शन: गुस्सा, चुटकी और हल्की-सी हार

लोग पहले से ही चिल्ला रहे हैं कि YouTube धीरे-धीरे पारंपरिक टीवी जैसा हो रहा है: शुरुआत में लंबे ऐड-ब्लॉक्स और बीच-बीच में ऐड। छोटे-छोटे वीडियो खोलो, और विज्ञापन वीडियो से लंबा लगने लगे — यह शिकायत आम हो गई है। कुछों ने यह भी नोट किया है कि YouTube की सर्च क्वालिटी और कुल अनुभव भी पहले जैसा नहीं रहा।

पैसा बोलता है

कारोबार की भाषा में YouTube काफी सफल रहा है। कुछ सालों में यह सर्विस अमेरिका में टॉप-रैंकिंग स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म बनी रही और विज्ञापन से होने वाली आमदनी अरबों में है। आने वाले वर्षों में यह रेवेन्यू बढ़ने की संभावना है, इसलिए छोटा-सा ऐड-टिकना अब रणनीति बन चुका है।

तो अब क्या करें?

अगर आप क्रोधित हैं तो विकल्प सीमित हैं:

  • प्रिमियम सब्सक्रिप्शन लेना: ऐड-मुक्त अनुभव चाहिए तो पेमेंट सबसे सीधा रास्ता है।
  • एडब्लॉकर: काम कर सकता है पर प्लैटफ़ॉर्म पर रिस्क बढ़ जाता है और कुछ मामलों में वीडियो ब्लॉक हो सकते हैं।
  • सहनशीलता बढ़ाना: या तो टीवी छोड़ें और छोटे क्लिपों के लिए मोबाइल पर ट्यून करें, या ऐड को एक नई तरह का ब्रेक मानकर चाय बना लें।

अंत में, यह याद रखें कि जो प्लेटफॉर्म मुफ़्त कंटेंट देता है, उसके पैसे किसी न किसी जगह से आते हैं। और फिलहाल YouTube का फैसला यह है कि टीवी पर आपका मनोरंजन थोड़ा और विज्ञापन-पूरित होगा। हमें बस रोना है, या फिर उपयुक्त मीम बनाकर ट्विटर पर शेयर करना है।

नोट: यह खबर अब तक टीवी स्ट्रीमिंग अनुभव पर लागू दिख रही है; अन्य प्लेटफॉर्म पर यह बदलाव अलग समय पर या अलग तरीके से दिखाई दे सकता है।