बढ़ती कीमतों के बीच कंसोल का भविष्य फिर सवालों में

गेमिंग हार्डवेयर की कीमतें पिछले कुछ महीनों में लगातार ऊपर गई हैं, और वजहें भी कम दिलचस्प नहीं हैं। AI के बढ़ते इस्तेमाल, RAM की कमी और उत्पादन लागत बढ़ाने वाले कई दूसरे कारकों ने कंसोल बनाना महंगा कर दिया है। नतीजा यह कि Microsoft ने 2025 में Xbox Series X|S की कीमतें बढ़ाईं, और Sony ने भी हाल ही में PlayStation 5 के दाम बढ़ाने की घोषणा कर दी।

अब चिंता सिर्फ मौजूदा पीढ़ी तक सीमित नहीं है। अनुमान है कि बेस PlayStation 6, पिछले मॉडल की तुलना में 50% तक महंगा हो सकता है। कुछ वैरिएंट्स की कीमत तो $1,000 तक पहुंचने की बात कही जा रही है। यानी अगली पीढ़ी में अपग्रेड करना कई खिलाड़ियों के लिए आसान फैसला नहीं रहेगा। कंसोल खरीदना पहले ही एक शौक जैसा लगने लगा था, अब वह शायद निवेश-स्तर पर पहुंच रहा है।

Michael Pachter की नज़र में समाधान क्या है

Wedbush Securities के विश्लेषक Michael Pachter ने अपने YouTube वीडियो, “How the AI RAM shortage crisis could kill video game consoles!” में कहा कि हार्डवेयर की कीमतें कम होने की संभावना बहुत कम है, भले ही RAM की कमी का संकट कभी सुलझ जाए।

उनके मुताबिक, आर्थिक इतिहास की सीख सीधी है: कीमतें आमतौर पर नीचे नहीं जातीं। Pachter ने कहा कि विक्रेता एक ऐसी कीमत खोज लेते हैं, जहां उपभोक्ता तकलीफ के बावजूद खरीदारी करते हैं।

इसी तर्क पर आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा कि जब तक घटकों की मांग, खासकर AI जैसी वजहों से, बढ़ती रहेगी, कंसोल की कीमतें भी चढ़ती रहेंगी। और अगर कोई स्थायी समाधान चाहिए, तो वह पारंपरिक कंसोल से छुटकारा पाना होगा।

उनका सुझाव है कि गेमिंग को टीवी पर सीधे स्ट्रीमिंग मॉडल में ले जाया जाए, ठीक वैसे ही जैसे लोग Netflix देखते हैं। उनके अनुसार, यही मौजूदा हार्डवेयर लागत संकट का असली जवाब हो सकता है।

स्ट्रीमिंग तो है, लेकिन कहानी इतनी सरल भी नहीं

Microsoft और Sony दोनों पहले ही स्ट्रीमिंग की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। Xbox Cloud Gaming और PlayStation Portal की मदद से बिना कंसोल के भी कुछ गेम खेले जा सकते हैं। लेकिन यह व्यवस्था अभी भी पूरी तरह सहज नहीं है। लैग, सीमित गेम लाइब्रेरी और दूसरी तकनीकी अड़चनें इसका हिस्सा बनी हुई हैं।

Pachter के मुताबिक, अगर ऐसी स्ट्रीमिंग सेवा हो जो सीधे टीवी पर चले, और जिसमें ये कमियां न हों, तो कंसोल की जरूरत ही खत्म हो सकती है। यानी समस्या का हल नया हार्डवेयर नहीं, बल्कि हार्डवेयर की जरूरत ही कम कर देना है।