ड्राइवरों की आवाज अब ग्रुप चैट में भी गूंज रही है

GPDA अध्यक्ष Alexander Wurz के मुताबिक F1 ड्राइवरों का WhatsApp ग्रुप इस समय खासा सक्रिय है। उनका कहना है कि तकनीकी नियमों में संभावित बदलावों को लेकर यह समूह अब “exploding” यानी सुझावों, भावनाओं और तकनीकी विचारों से लगभग फट ही पड़ा है।

अप्रैल के शटडाउन के दौरान F1, FIA, ड्राइवरों, टीमों और पावर यूनिट निर्माताओं के बीच बातचीत तय है। चर्चा का केंद्र नए पावर यूनिट्स की ऊर्जा-प्रबंधन संबंधी मांगों में संभावित संशोधन होगा। पहले तीन ग्रां प्री में कई दिक्कतें सामने आने के बाद यह मुद्दा अब और गंभीर हो गया है।

सुनवाई की मांग और बढ़ा दबाव

Carlos Sainz, जो ड्राइवरों के ट्रेड यूनियन निकाय में निदेशक की भूमिका निभाते हैं, जापानी ग्रां प्री में Oliver Bearman की बड़ी दुर्घटना के बाद खास तौर पर मुखर रहे। उनका कहना था कि FIA को ड्राइवरों की प्रतिक्रिया और सुझावों को गंभीरता से सुनना चाहिए, क्योंकि नियम आखिरकार उन्हीं के लिए और उन्हीं पर लागू होते हैं। छोटी-सी बात नहीं, भले ही कभी-कभी ऐसा लगता हो कि यह सारा ढांचा चर्चा के लिए ही बना है।

Wurz, जो खुद पूर्व F1 ड्राइवर हैं, ने Lift and Roast पॉडकास्ट में बताया कि 2026 के तकनीकी दौर को लेकर ड्राइवरों के बीच नए-नए विचार लगातार आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 2015 या 2016 में बनाए गए उस मशहूर WhatsApp ग्रुप में इस समय गतिविधि असामान्य रूप से तेज है। उनके मुताबिक वहां:

  • भावनाएं हैं
  • संभावित समाधान हैं
  • तकनीकी प्रस्ताव हैं
  • और इस बात पर विचार हैं कि ड्राइवरों को सुना जाना क्यों जरूरी है

Wurz ने यह भी साफ किया कि वे उस बातचीत का ब्योरा बाहर साझा नहीं कर सकते, क्योंकि GPDA निदेशक के रूप में उनकी भूमिका की एक सीमा है। ग्रुप में जो होता है, वही वहीं रहता है। दुर्लभ समझदारी का एक छोटा-सा उदाहरण, मानो paddock ने समय पर सांस ले ली हो।

उनका निष्कर्ष सीधा था: ड्राइवर भावनात्मक होते हैं, लेकिन उनकी दिलचस्पी राजनीति में नहीं, बल्कि प्रोडक्ट में है।