अमेरिका और इज़राइल के युद्ध के 12वें दिन खबरों में सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या अमेरिकी जवान ईरान की जमीन पर उतरेंगे? हाल के गोपनीय सैन्य ब्रीफिंग के बाद कुछ सांसद खुले तौर पर चिंतित और गुस्से में दिखे, और जनता भी जमीन सेना भेजने के विचार से नाखुश है। नीचे हम सरल भाषा में जानते हैं कि क्या कहा जा रहा है, विकल्प क्या हैं और क्या संभावित नतीजे हो सकते हैं.
क्या अधिकारी कह रहे हैं?
सरकारी बयानों ने स्पष्ट ना कहा है और ना ही पूरी तरह इनकार किया है. रक्षा मंत्री ने कहा है कि हम "जहां तक ज़रूरत होगा" जा सकते हैं और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोका जाएगा. व्हाइट हाउस ने कहा है कि अभी जमीन अभियान योजना का हिस्सा नहीं है, लेकिन विकल्प खुले रखे जा रहे हैं.
एक कांग्रेसी ब्रीफिंग में यह भी बताया गया कि यदि वास्तव में परमाणु सामग्री को भौतिक रूप से सुरक्षित करना है तो "लोगों को जाकर उसे लाना होगा." यह वाक्य लोगों ने नोट किया क्योंकि यह सीधा संकेत है कि हो सकता है कुछ दलों को अंदर जाना पड़े.
कई डेमोक्रेट नेताओं ने प्रशासन से यह आश्वासन माँगा कि हमला क्यों शुरू हुआ और आगे के उद्देश्य क्या हैं. कुछ सांसदों ने कहा कि ब्रीफिंग के बाद वे और भी अधिक सवालों के साथ निकले, ना कि साफ जवाब के साथ.
जनता क्या सोचती है?
हालिया सर्वे दिखाते हैं कि ज़्यादातर अमेरिकियों को ईरान में अमेरिकी जमीन टुकड़ियों को भेजने का विचार पसंद नहीं है. एक सर्वे में करीब 74 प्रतिशत ने आपत्ति जताई. दूसरे तात्कालिक सर्वे में भी एक बड़ा हिस्सा या तो विपक्षी था या अनिश्चित था, और केवल लगभग एक चौथाई ने हमलों को मंजूरी दी.
जमीनी अभियान कैसा दिख सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की भौगोलिक रचना काफी कठिन है. यह इराक से चार गुना बड़ा है और इसमें पहाड़ी और कठोर इलाकों की भरमार है. इसलिए पारंपरिक बड़े पैमाने पर घुसपैठ बहुत कठिन और जोखिम भरी होगी.
ज्यादा संभावित परिदृश्य यह है कि अमेरिका बड़े बलों के बजाय छोटे, विशेष-प्रशिक्षित इकाइयों को उपयोग में लाएगा. ऐसे ऑपरेशन्स में तेजी, सटीकता और सीमित जोखिम पर जोर रहेगा. उल्लेख्य बिंदु:
- लक्ष्य: मुख्य परमाणु संस्थान जैसे नटांज, फोर्डो और इस्फहान जैसी साइटें; आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप भी संवेदनशील हो सकता है.
- एक्शन: पहले वायु श्रेष्ठता और वायु रक्षा दबाना जरूरी होगा ताकि हवाई और समर्थन साधन सुरक्षित रूप से काम कर सकें.
- कौन भेजा जा सकता है: तेज तैनाती वाले पैराशूट डिवीज़न और विशेष बल जैसे नौसेना सील या आर्मी स्पेशल फोर्सेज को ऐसे मिशन के लिए नामुमकिन नहीं माना जा रहा है.
- लक्ष्य संकेत: प्रमुख काम संवेदनशील सामग्री का पता लगाना, उसे सुरक्षित करना और जल्दी से बाहर निकलना होगा.
ईरान कैसे जवाब दे सकता है?
ईरान ने पहले ही क्षेत्र में अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर मिसाइल और अलग-अलग हमले किए हैं. अगर अमेरिकी जमीनी अभियान हुआ तो इसका मतलब sustained हवाई समर्थन और बड़ा ग्राउंड कांटिंगेंट होगा, और विश्लेषक कहते हैं कि इससे उत्तर काफी तीव्र हो सकता है.
छोटी ऑपरेशन भी संघर्ष को बढ़ा सकती है, मिसाइल हमलों की एक नई लहर या ईरानी सहयोगी समूहों के हमलों में इज़ाफा कर सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ऑपरेशन उच्च जोखिम वाले, जटिल और लंबी अवधि के हो सकते हैं, खासकर जब ईरान की सुरक्षा व्यवस्थाएं अभी भी सक्रिय नजर आती हैं.
क्या अमेरिका ने पहले हमले किए हैं?
हाँ. पिछले साल एक बड़े ऑपरेशन के तहत अमेरिकी बलों ने ईरान की कुछ प्रमुख परमाणु साइटों पर बमबारी और मिसाइल हमले किए थे, जिसमें नटांज, फोर्डो और इस्फहान प्रमुख थे. रात के अँधेरे में स्टील्थ बमवर्षक और क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल बताया गया था, जिसका उद्देश्य संवर्धन क्षमताओं को प्रभावित करना था. इस बारे में अलग-अलग सरकारी बयान तथा अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आकलन भी सामने आए थे.
इंटरनेशनल परमाणु एजेंसी ने चेताया था कि कुछ सुविधाएं अभी भी मौजूद हैं और ईरान कुछ महीनों में फिर से संवर्धन शुरू कर सकता है, यदि स्टॉकपाइल्स का स्थान बदला गया हो या न किया गया हो.
निष्कर्ष
तथ्य ये हैं: अमेरिकी सरकार ने जमीन सेना भेजने को पूरी तरह नकारा नहीं है, पर यह भी साफ नहीं किया है कि कब और कैसे. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो वह बड़ा, परिभाषित और सीमित लक्ष्य वाला ऑपरेशन होगा, न कि एक पारंपरिक दर्जे का आक्रमण. साथ ही, जोखिम और क्षेत्रीय परिणामी प्रतिक्रियाएँ बहुत गंभीर हो सकती हैं.
सरल शब्दों में: जमीन पर सैनिक भेजना आसान नहीं है, और अगर किया भी गया तो यह कोई त्वरित या सस्ता ऑपरेशन नहीं होगा. नतीजा देश और क्षेत्र के लिए लंबा और खतरनाक हो सकता है. जनता और कुछ सांसद अभी स्पष्ट योजनाओं की मांग कर रहे हैं, और समय बताएगा कि विकल्प कितने सीमित या खुले रहेंगे.