क्या हुआ: अमेरिका ने ईरान और इसराइल के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए एक 15‑बिंदुओं वाला प्रस्ताव ईरान को भेजा। एक उच्च स्तरीय कूटनीतिक स्रोत ने कहा कि तेहरान ने उस प्रस्ताव को "बहुत अधिक चरमवादी और अनुचित" बताया और इसे "कागज़ पर भी सुंदर नहीं" कहा।
ट्रंप की बात और ईरान की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत चल रही है, जबकि ईरान ने ऐसे किसी प्रत्यक्ष वार्ता से इनकार किया है। तेहरान का कहना है कि उसने स्पष्ट कर रखा है कि युद्ध रोकने के लिए किन शर्तों पर वह सहमत होगा और किन शर्तों को वह अस्वीकार कर देगा।
कूटनोत्सकों की भूमिका: पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की
- पाकिस्तान: सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिकी 15‑बिंदु प्रस्ताव ईरान को साझा किया। पाक के कूटनीतिक और सुरक्षा कनेक्शन, सिया अल्पसंख्यक और ईरान के साथ व्यापार इसे मध्यस्थ के रूप में उपयोगी बनाते हैं। इसके साथ ही पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता और सन्नियों वाला बहुमत इसे खाड़ी देशों के करीब भी रखता है।
- मिस्र: मिस्र ने कहा कि वह किसी भी बैठक की मेजबानी के लिए तैयार है जो तनावरहित करने में मदद करे। मिस्र का कहना है कि वह ट्रंप की पहल का समर्थन करता है और कूटनीति जारी रखनी चाहिए।
- तुर्की: अंकारा भी संदेश पहुँचाने की भूमिका निभा रहा है और दोनों पक्षों के बीच दूत का काम कर रहा है।
अमेरिकी प्रस्ताव में क्या था (सार)
- संबंधित स्रोतों के मुताबिक प्रस्ताव में आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कुछ कटौती, मिसाइलों पर सीमाएं और हॉर्मूज़ जलसंधि को फिर से खोलना शामिल था।
- एक मिस्रिय अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव में ईरान के सशस्त्र समूहों के समर्थन पर भी कुछ पाबंदियाँ थीं।
ईरान का अपना प्रस्ताव
राज्य प्रसारण की अंग्रेजी सेवा ने एक अनाम अधिकारी का हवाला देते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उस अधिकारी ने कहा, "ईरान तब युद्ध समाप्त करेगा जब वह खुद निर्णय लेगा और जब उसकी अपनी शर्तें पूरी हों।"
तेहरान की पेशकश की पांच मुख्य शर्तें इस तरह हैं:
- ईरानी अधिकारियों की हत्या रोक दी जाए
- यह सुनिश्चित किया जाए कि उसके खिलाफ कोई अन्य युद्ध न छेड़ा जाए
- युद्ध के नुकसान की भरपाई हो
- हिंसा और शत्रुता बंद हो
- हॉर्मूज़ की जलसंधि पर ईरान का संप्रभु अधिकार सुनिश्चित हो
मंच पर तनाव भी बढ़े हुए हैं
ईरान की आलोचना और शक इसलिए भी गहरी है क्योंकि उनके मुताबिक पहले भी उच्च स्तर की कूटनीति के दौरान उन पर हमले हुए। फरवरी 28 को हुए अमेरिकी हमलों के बाद मौजूदा संघर्ष शुरू हुआ था, और वही घटनाक्रम भरोसे को कमजोर करता है।
ईरान की प्रतिक्रिया के समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ भी बढ़ी हुई थीं: इसराइल ने तेहरान पर हवाई हमले किए और अमेरिका ने पैराट्रूपर्स और अतिरिक्त मरीन तैनात किए। इसी बीच ईरान ने भी इसराइल और खाड़ी के कुछ देशों पर हमले जारी रखे, जिनमें कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी आग लगने वाली घटना भी शामिल रही।
क्या अब बैठक होंगी?
मध्यस्थ जल्द‑से‑जल्द, संभवतः शुक्रवार को पाकिस्तान में आमने‑सामने बैठकों की बात कर रहे हैं। हालांकि ईरान ने कहा है कि उसने अभी तक किसी भी सीधे अमेरिकी संवाद को स्वीकार नहीं किया है और अब तक संदेशों का आदान‑प्रदान दूतों के जरिए हुआ है।
निष्कर्ष: प्रस्ताव भेजा गया, उसे ठुकराया गया, और कूटनीति चल रही है। साथ ही क्षेत्र में हवाई हमले और सैनिक तैनाती जैसी घटनाएँ जारी हैं। फिलहाल सबकी निगाहें यह देखने पर हैं कि मध्यस्थ बैठकें वास्तविक शांति की दिशा में कोई कदम होंगी या नहीं।