Kojima का लक्ष्य साफ था

Death Stranding 2 बनाते समय लेखक और निर्देशक Hideo Kojima ने अपनी टीम के सामने एक स्पष्ट मिशन रखा: इस बार ज़्यादा से ज़्यादा लोग गेम को अंत तक खेलें। यह कोई हल्का निर्देश नहीं था, बल्कि एक डाइरेक्टिव था ताकि खेल को पूरा करने वाले खिलाड़ियों की संख्या बढ़े।

लीड लेवल डिजाइनर का बयान

लीड लेवल डिजाइनर Hiroaki Yoshiike ने हाल ही में PC Gamer के इंटरव्यू में बताया कि Kojima ने कहा, “Kojima चाहता था कि अधिक लोग गेम का अंत देखें। यह एक आदेश था।” यानि टीम का फोकस सिर्फ कला दिखाने पर नहीं, बल्कि उस कला को खिलाड़ियों तक पहुँचाने पर भी था।

गलत व्याख्या और असली वजह

पहले एक व्यापक रूप से साझा की गई टिप्पणी ने यह संकेत दिया कि Kojima ने गेम को जानबूझकर अजीब बनाया क्योंकि प्ले टेस्ट में खिलाड़ी इसे बहुत पसंद कर रहे थे। यह उद्धरण थोड़ा नाटकीय तरीके से पेश किया गया था और लोगों ने इसे ऐसे लिया कि निर्देशक ने खेल को ज्यादा पारंपरिक न होने देने के लिए बदल दिया।

असलियत में Kojima ने बाद में स्पष्ट किया कि जो बदलाव किए गए वे फोकस टेस्ट के आधार पर थे। उन्होंने गेम की कहानी को अधिक स्पष्ट बनाया और खेल को अधिक खेलने योग्य और मजेदार बनाने के लिए बदलाव किए। उनका मकसद यह नहीं था कि खेल बिल्कुल सरल और आसानी से भूलने लायक बन जाए।

नतीजा क्या रहा

  • डायरेक्शन साफ था: अधिक खिलाड़ियों को अंत तक पहुँचाना।
  • कई बदलाव फोकस टेस्ट से आए, न कि सिर्फ़ कलाकारिक प्रयोग के लिए।
  • Kojima ने कहानी और प्लेएबिलिटी दोनों पर काम किया ताकि अनुभव संतुलित रहे।

संक्षेप में, Death Stranding 2 के पीछे की सोच सिर्फ अलग दिखने या अजीब होने की कोशिश नहीं थी। यह इसलिए भी था ताकि खिलाड़ी खेल को पूरा करने का अनुभव ले सकें और खेल ज़माने भर में जल्दी भूलने लायक न बने।