ब्रसेल्स में यूरोपीय विदेश मंत्रियों की बैठक के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आग्रह पर यूरोपीय देशों ने फारस की खाड़ी के अहम जल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। तेल की कीमतें उछल रही हैं और ट्रंप ने सहयोगी देशों से इस मार्ग की सुरक्षा की मांग की थी।
किसने क्या कहा
जर्मनी के विदेश मंत्री जेरोम वाडेफुल ने साफ कहा कि बर्लिन ऐसा कोई सैन्य अभियान शुरू करने का इरादा नहीं रखता। उनकी बात का निहितार्थ यह था कि यूरोपीय देश बिना स्पष्ट जानकारी और साझा योजना के सीधे युद्ध में कूदने को तैयार नहीं हैं।
वाडेफुल ने पत्रकारों से कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि अमेरिका और इजरायल पहले उन्हें सूचित करें और शामिल करें। इसके बाद ही एक व्यापक सुरक्षा वास्तुकला पर बात की जा सकती है, जिसमें क्षेत्र के पड़ोसी देशों को भी शामिल करना होगा।
कौन क्या करेगा और कौन नहीं
- ग्रीस के प्रवक्ता पावलोस मारिनाकिस ने कहा कि ग्रीस हॉर्मुज में किसी सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगा।
- इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने कहा कि इटली ऐसी नौसैनिक मिशन का हिस्सा नहीं है जो इस इलाके तक फैल सके।
- डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि यूरोप को खुला दिमाग रखना चाहिए और यह देखा जाना चाहिए कि किस तरह नेविगेशन की आजादी सुनिश्चित की जा सकती है, भले ही उन्होंने ईरान के साथ युद्ध के फैसले का समर्थन न किया हो।
- यूनाइटेड किंगडम ने कहा कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए एक सामूहिक योजना पर काम कर रहा है, लेकिन यह मुश्किल होगा।
यूरोपीय दबाव और तेल की कीमतें
ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने बैठक से पहले कहा कि नेताओं की चर्चा का फोकस यह होगा कि यूरोपीय संघ सामूहिक रूप से इस जल मार्ग को खोलने में कैसे योगदान दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट की बंदी से तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई हैं और इससे रूस को यूक्रेन पर जारी युद्ध के कारण लाभ हो रहा है, क्योंकि ऊर्जा राजस्व युद्ध को वित्तपोषित कर रहा है।
एजेंसी रिपोर्टर की व्याख्या यह रही कि यूरोपीय नेता ट्रंप के दवाब को महसूस कर रहे हैं, पर उनकी तत्परता युद्ध में शामिल होने की नहीं है। वे मार्ग खोलने के तरीके तलाशेंगे, पर इसका मतलब यह नहीं कि वे युद्धपोत भेज देंगे।
नाटो, प्रस्ताव और शंकाएं
ट्रंप ने नाटो और मित्र देशों से एक नौसैनिक गठबंधन बनाने की मांग की ताकि हॉर्मुज को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर उनका प्रस्ताव खारिज हुआ तो नाटो का भविष्य कठिन हो सकता है।
फ्रांस ने सुझाव दिया कि यूरोपीय संघ अपनी छोटी नौसैनिक पहल Aspides का दायरा बढ़ा सकता है। यह मिशन पहले से रेड सी में जहाजों को यमनी हूती हमलों से बचाने के लिए स्थापित था और इसमें कुछ इतालवी और ग्रीक जहाज भी शामिल हैं।
जर्मनी और कुछ अन्य देशों ने इस तरह के कदम पर सवाल उठाए। जर्मन रक्षा मंत्री Борिस पिस्तोरियस ने पूछा कि क्या कुछ यूरोपीय फ्रिगेट्स से वह फर्क पड़ेगा जो अमेरिकी नौसेना अधिक मजबूती से कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह उनकी जंग नहीं है और जर्मनी ने इसे शुरू नहीं किया। इसके बावजूद उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं कि नाटो इस मुद्दे पर टूटेगा।
संदर्भ में संघर्ष की तस्वीर
यह स्थिति उस युद्ध का हिस्सा है जिसमें अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी के बाद ईरान पर व्यापक हमले किए और ईरान ने अलग-अलग हिस्सों में मिसाइल और ड्रोन से पलटवार किया। इन घटनाओं ने ग्लोबल ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समंदर का वह नुक्ता है जिसके माध्यम से दुनिया के ऑयल शिपमेंट्स का लगभग पच्चीस प्रतिशत पार करता है। इसलिए इसकी सुरक्षा आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, पर राजनीतिक और सैन्य तौर पर संवेदनशील भी है।
नतीजा: यूरोपीय नेता तेल की कीमतों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, पर वे सीधे सैन्य भागीदारी के लिए तैयार नहीं दिख रहे। वे कहते हैं कि पहले बेहतर जानकारी और साझा रणनीति चाहिए।
संक्षेप में, यूरोप कह रहा है: समस्या समझते हैं, समाधान चाहते हैं, पर बिना योजना और शामिल होने की स्पष्ट जानकारी के युद्ध में कूदना नहीं करेंगे।