जापान GP: छोटे-छोटे पलों का बड़ा असर
फ़्री प्रैक्टिस 1 में मिली ऑनबोर्ड फुटेज में मैक्स वेरस्टैपेन 130R तक पहुंचते हुए 320 किमी/घंटा की रफ्तार दिखा रहे थे। लेकिन सुपर-क्लिपिंग के चलते चक्कर भरते ही और अंतिम चेकेन तक जाते-जातें उनकी रफ्तार में लगभग 50 किमी/घंटा तक का नुकसान देखना आसान था।
सुपर-क्लिपिंग क्या कर रहा है
सुपर-क्लिपिंग का मतलब है कि ड्राइवर फुल थ्रॉटल पर रहते हुए बैटरी को रिचार्ज कर रहा है। सुनने में तकनीकी लग सकता है, लेकिन असर साफ दिखा: जहाँ तेज चलना चाहिए था, वहां कार असल में कोस्ट करती दिखी क्योंकि पावर उपलब्ध नहीं थी।
नियमों में बदलाव
क्वालिफाइंग में बैटरी मैनेजमेंट और ड्राइवर स्किल के संतुलन पर चिंता जताने के बाद, इस वीकेंड के लिए ड्राइवरों को अब 9MJ की जगह 8MJ एनर्जी तक ही एक्सेस मिलेगी। यह कदम इस मामले को नियंत्रित करने की कोशिश है।
हैमिल्टन का दिन और उनकी बात
- हैमिल्टन दोनों सेशनों में छठे स्थान पर रहे।
- उन्होंने कहा कि कार अधिकांश सेक्शनों में अच्छी लगती है, पर तेज़ी के मामले में अभी काफ़ी काम बाक़ी है।
- उनकी नजर सेट-अप और बैलेंस पर थी. उन्होंने बताया कि स्ट्रेट में समय गंवाया जा रहा है और टर्न 1 तक मैकलारेन की तुलना में लगभग 0.4 सेकंड का अंतर है।
- हैमिल्टन ने सीधे कहा कि सुपर-क्लिपिंग "अच्छा नहीं है" और कुछ जगहों पर कार में पावर न होने की वजह से ड्राइवर को बस कोस्ट करना पड़ता है, जो इस नियम परिवर्तन का सबसे कम मजेदार हिस्सा है।
संक्षेप में, फुटेज ने यह दिखाया कि तकनीकी नियमों का ट्रैक पर सीधा असर हो सकता है और टीमों को अपने सेट-अप और ऊर्जा प्रबंधन पर जल्दी काम करना होगा। हैमिल्टन का मानना है कि सही सेट-अप मिलने पर और प्रदर्शन निकाला जा सकेगा, पर अभी सुपर-क्लिपिंग ने कुछ मुश्किलें बढ़ा दी हैं।