FIA ने Suzuka वीकेंड से पहले क्वालीफाइंग के नियमों में बदलाव किया है। अब हर लैप में अधिकतम रिकवर की जाने वाली ऊर्जा 9 मेगाजूल से घटाकर 8 मेगाजूल कर दी गई है। यह फैसला टीमों और इंजन निर्माताओं के साथ सहमति से लिया गया और मकसद यह है कि जापान के ट्रैक पर क्वालीफाइंग के समय कारें lift and coast और clipping जैसी एक्सट्रीम एनर्जी मैनेजमेंट ट्रिक्स पर निर्भर न हों।
क्यों Suzuka पर यह जरूरी था
Suzuka एनर्जी रिकवरी के लिहाज से थोड़ा चैलेंजिंग ट्रैक है। यहां बड़े ब्रेकिंग जोन कम हैं जहां MGU-K ज्यादा ऊर्जा वापस दे सकता है। खासकर पहले सेक्टर की तेज़-तीव्र "esses" सीक्वेंस ऐसी जगहें हैं जहां ड्राइवर अक्सर एनर्जी रिकवरी के लिए अपना रेसिंग लाइन बदलने लगते हैं। इसी तरह Degner और Spoon कॉर्नर भी चिंता के कारण बने हुए थे।
कम रिकवरी, ज्यादा रेसिंग
FIA की आधिकारिक बात का सार यह है कि बदलाव क्वालीफाइंग को फिर से "ड्राइवर पर्फॉर्मेंस" की परीक्षा बनाये रखेगा। नियम 2026 के नए ढांचे का परीक्षण शुरु हो चुका है और यह एक साधारण ऑप्टिमाइज़ेशन स्टेप है। FIA ने कहा है कि टीमों और मोटर निर्माताओं के साथ आगे भी चर्चा जारी रहेगी ताकि एनर्जी मैनेजमेंट का संतुलन सही रखा जा सके।
आगामी बदलावों के विकल्प
- इलेक्ट्रिक मोटर की पावर घटाना: इससे इलेक्ट्रिक डिमांड कम होगी और टीमों को अतिरिक्त रीकवरी रणनीतियाँ अपनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- इंजन से रिचार्ज बढ़ाना: V6 इंजन द्वारा रिचार्ज पावर बढ़ा कर MGU-K को सुपर-क्लिपिंग के जरिये 350 kW तक देना, जो अभी 200 kW के आसपास है। इसके साथ ही ईंधन फ्लो या फ्लोमीटर के समायोजन पर भी विचार हो रहा है।
Oliver Bearman का नज़रिया
Oliver Bearman ने कहा कि कम एनर्जी का मतलब यह भी होगा कि कुछ हिस्सों में कारें धीमी दिख सकती हैं। उनका कहना था कि 1 MJ की कमी का असर उन्हें सिमुलेटर के मुकाबले महसूस होगा और वे कम एनर्जी की स्थिति में कई सेकंडिंग्स बिना इलेक्ट्रिक सहायता के बिताएंगे। Bearman का कहना है कि अगर रिचार्ज 350 kW दिया जा सके तो चीजें आसान होंगी।
कहाँ-कहाँ लागू होगा यह नियम
- यह 8 MJ की सीमा सिर्फ क्वालीफाइंग के लिए है।
- फ्री प्रेक्टिस सत्रों में टीमें अभी भी हर लैप पर 9 MJ तक रिकवर कर सकेंगी।
- रacem दौरान, बिना Overtake Mode के, रिकवरी लिमिट 8.5 MJ रहेगी।
कुल मिलाकर यह छोटा सा नियम-समायोजन है जिसका मकसद क्वालीफाइंग को फिर से ड्राइवर-केंद्रित बनाना है, लेकिन असर पपड़ी की तरह नहीं है: कुछ टीमों और ड्राइवरों को इसकी कड़वी खुशबू महसूस होगी। FIA और टीमें आगे भी बड़े बदलावों पर विचार कर रही हैं ताकि संतुलन बेहतर बनाया जा सके।