तेल की कीमतें फिर से $100 प्रति बैरल के पार चली गईं, और इस बार वजह है मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे पर बढ़ते हुए हमले और व्यापारिक मार्गों में खतरों का बढ़ना। हालांकि कई देशों ने आपातकालीन भंडार खोलकर स्थिति को संभालने की कोशिश की, बाजार में घबराहट कम नहीं हुई।

क्या हुआ?

ईरान ने क्षेत्रीय आर्थिक और ऊर्जा लक्ष्य बढ़ाकर निशाना बनाने की तीव्रता बढ़ा दी है। इससे फारस की खाड़ी और विशेषकर सूज़ह-ए-हर्मुज के आसपास के समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ गया है, जो वैश्विक समुद्री तेल और गैस यातायात के लिए बेहद अहम है।

  • कई व्यापारी जहाजों पर हमले दर्ज किए गए। थाईलैंड पंजीकृत जहाज Mayuree Naree के चालक दल के तीन सदस्य फंसे होने की सूचना मिली।
  • इराक ने अपने तेल बंदरगाहों पर सभी संचालन रोक दिए, दो पास के टैंकरों पर हमले के बाद यह कदम उठाया गया।
  • बहरीन ने मुहैराक़ गवर्नरेट में ईंधन टैंकों पर हमले के बाद नागरिकों को घर पर रहने की सलाह दी।
  • ओमान ने अपने मुख्य निर्यात टर्मिनल मीना अल फाहल से जहाजों को हटा लिया, दूसरा पोर्ट ड्रोन हमलों का शिकार हुआ।

बाजार पर असर

ब्रेंट क्रूड रुफ़बी 9 प्रतिशत उछल कर $100.29 प्रति बैरल तक गया, बाद में यह थोड़ा नीचे आकर $98 के आसपास रहा। इस सप्ताह पहले ही ब्रेंट चार साल में पहली बार तीन अंकों में पहुंच चुका था, और एक समय यह $119 तक भी छू गया था। साल की शुरुआत में कीमतें लगभग $60 थीं।

अमेरिकी WTI क्रूड भी तेज़ी से बढ़ा और $94.75 के आसपास पहुंचा। एशियाई सूचकांक दबाव में आए, जापान का निक्केई 225 लगभग 1.6 प्रतिशत नीचे गया और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.2 प्रतिशत नीचे रहा। यूरोपीय गैस की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं।

सरकारी और अंतरराष्ट्रीय कदम

ऊर्जा आपूर्ति की आशंकाओं को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपनी सदस्य देशों के साथ मिलकर इतिहास का सबसे बड़ा जारी करने का फैसला किया और 400 मिलियन बैरल आपात क्रूड जारी करने पर सहमति जताई। संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व से 172 मिलियन बैरल जारी करने का ऐलान किया, जो अगले सप्ताह से शुरू होगा और वितरण में लगभग 120 दिन लगने की उम्मीद है।

अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने कहा कि यह रिलीज़ शुरुआत होगी और साथ ही ईरान पर यह आरोप लगाया गया कि उसने अमेरिका और उसके सहयोगियों की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करने की कोशिश की।

संकट की तीव्रता और आगे की राह

ईरानी सैन्य कमान ने तेल की क़ीमतें और ऊंची होने की चुनौती देते हुए कहा कि तेल की कीमतें क्षेत्रीय सुरक्षा पर निर्भर करती हैं। सच्चाई यह है कि अगर प्रमुख समुद्री मार्ग जैसे कि हर्मुज बंद रहते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।

अनुमान और विश्लेषण करने वाली संस्थाओं ने भी अपने पूर्वानुमान समायोजित किए हैं। एक प्रमुख बैंक ने चौथे तिमाही 2026 के लिए ब्रेंट का पूर्वानुमान बढ़ाया, और बाज़ार विश्लेषक कह रहे हैं कि दीर्घकालिक संघर्ष से स्टैगफ्लेशन का जोखिम बन सकता है — यानी कीमतें ऊंची रहें और आर्थिक वृद्धि धीमी रह सकती है।

संक्षेप में

अभी का परिदृश्य यह संकेत देता है कि आपूर्ति की चिंताएं तत्काल कम नहीं होने वालीं। भंडार जारी करने से कुछ राहत मिल सकती है, पर जब तक समुद्री मार्गों और तंत्रों पर हमला जारी रहेगा, तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी रहेगी। उपभोक्ता और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए यह अनिश्चित समय है, इसलिए निगरानी, रणनीति और तैयारियों की जरूरत बढ़ गई है।

नोट: लेख में प्रस्तुत संदर्भ घटनाओं और आंकड़ों का स्रोत हालिया रिपोर्टिंग है।